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बाढ़ प्रभावित गांवों में फैला संक्रामक रोग, 28 बीमार

Sun, 27 Aug 2017 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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बाढ़ के साथ अब संक्रामक रोग तेजी से पांव पसार रहे हैं। गांजरी क्षेत्र में 40 गांवों में संक्रामक रोग फैल रहा है। क्षेत्र में करीब 2 हजार से अधिक लोग इसकी चपेट में हैं। इलाज के नाम पर क्षेत्र में तीन बाढ़ राहत केंद्र बनाए गए हैं, जिन पर महज तीन डॉक्टर ही तैनात किए गए हैं। नतीजतन लोगों को प्राइवेट अस्पतालों व झोलाछाप की शरण में जाने को मजबूर हैं। लोग इलाज को तरस रहे हैं।
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टापू पर बसे पचीसा गांव में इन दिनों संक्रामक रोग तेजी से पांव पसारा है। टापू के दीपू (5), अशोक (6), बबलू (2), जियालाल (20), संजय (12), दिनेश (14), मायाराम (40), निशा (14) समेत करीब 28 लोग तीन नावों पर सवार होकर बाढ़ के पानी पर करीब पांच किलोमीटर की दूरी तय कर मारूबेहड़ पहुंचे थे। सभी को बुखार, उल्टी, दस्त की शिकायत थी।

इन मरीजों ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य सेवा महज दिखावा है। कहीं पर भी स्वास्थ्य टीमें नजर नहीं आ रही हैं। इसलिए सभी को प्राइवेट चिकित्सकों व झोलाछाप डॉक्टरों के यहां इलाज कराना पड़ रहा है। पीड़ितों ने बताया कि  पचीसा गांव में करीब 30 से 40 संख्या में लोग बीमार पड़े हैं।
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इसी तरह से कोनी, दुर्गा पुरवा, बिल्लरपुरवा, लालारामपुरवा, पासिनपुरवा, परमेश्वर पुरवा, नगीना पुरवा, नई बस्ती, दर्जिन रेती, रामलाल पुरवा, रंडा कोडर, सीपतपुर, बगस्तीपुर समेत 40 ऐसे गांव हैं जहां पर संक्रामक रोगों ने तेजी से पांव पसारा है। स्वास्थ्य सेवाओं का हाल यह है कि मारू बेहड़, थानगांव व एक अन्य स्थान पर बाढ़ राहत चौकी बनाई गई है। इन्हीं चौकियों पर तीन डॉक्टर तैनात हैं।

जबकि इस पूरे क्षेत्र में करीब 2 हजार से अधिक संख्या में लोग बीमार पड़े हैं। इन लोगों के सामने समस्या यह है कि वे बाढ़ के पानी से निकल कर इतनी आसानी से अस्पताल तक नहीं पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि बहुत से पीड़ित बीमार होने के बावजूद भी अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते हैं।

बाढ़ पीड़ित इलाके का हाल यह है कि संक्रामक रोगों से पीड़ित होकर करीब 5 लोगों ने दम तोड़ा है। इनमें तीन बच्चे शामिल हैं। इस क्षेत्र के अधिकतर लोगों को मलेरिया, डायरिया जैसी बीमारियां जकड़ रही हैं।बाढ़ पीड़ित इलाके के बाशिंदों का कहना है कि अगर इस क्षेत्र में डॉक्टरों की मोबाइल टीमें तैनात हों, तो बीमार लोगों को काफी राहत मिल सकेगी। मोबाइल टीमें आने से लोगों को अपने घर पर ही इलाज मिल सकेगा।
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