सीतापुर। यातायात पुलिस की सख्ती के बावजूद भी परिवहन निगम के बस चालक अपनी मनमानी कर रहे हैं। लगातार चेतावनी के बाद भी चालक बस स्टेशन परिसर के बाहर ही बसों को खड़ा कर सवारियां बैठा रहे हैं। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर यातायात पुलिस बीते छह माह में हर माह औसतन 100 से अधिक चालान के हिसाब से अब तक 11 लाख रुपये का चालान काट चुकी है। इसके बावजूद ट्रैफिक जाम का कारण बनने वाली इस परेशानी से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
इस समस्या के निस्तारण को लेकर परिवहन विभाग के जिम्मेदार भी बस पत्राचार तक ही सीमित है। एआरएम स्तर से सभी बसों को बस स्टेशन परिसर के भीतर ही खड़ा करके सवारियां भरने की शुरू कराई गई व्यवस्था भी सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई है। इसका खामियाजा यात्रियों के साथ ही बस स्टेशन के पास से गुजरने वाले राहगीरों को उठाना पड़ रहा है।
शहर के बस अड्डे पर दिन भर बसों का आना-जाना लगा रहता है। लखनऊ, लखीमपुर, दिल्ली, शाहजहांपुर, हरदोई आदि जिलों में जाने के लिए एक ही मार्ग है। इसके बावजूद मार्ग को खाली रखने के स्थान पर बस चालक इसी मार्ग पर बसों को खड़ाकर सवारियां भरते नजर आते हैं। ऐसे में जाम की स्थिति में सवारियों के अलावा आम राहगीरों को भी समस्या का सामना करना पड़ता है। यातायात पुलिस जनवरी माह से जून तक रोडवेज की 681 निगम बसों का चालान कर 10.95 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा चुकी है। बसों की बेतरतीब पार्किंग के कारण महज 100 मीटर की दूरी तय करने में लोगों को घंटों लग जाते हैं।
माहवार चालानों और जुर्माने पर एक नजर
माह चालान जुर्माना
जनवरी 96 एक लाख 19 हजार 500
फरवरी 125 एक लाख 76 हजार
मार्च 99 एक लाख 95 हजार 500
अप्रैल 104 एक लाख 35 हजार 500
मई 135 दो लाख 22 हजार 500
जून 122 दो लाख 46 हजार 500
पूर्व में पुलिस अधीक्षक की ओर से परिवहन निगम के आरएम और एआरएम को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बाद भी कोई बस चालक और उनके जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। लगातार यातायात पुलिस चालान कर रही है, जब तक समस्या से निजात नहीं मिलेगी, हमारी कार्रवाई चलती रहेगी।
फरीद अहमद, यातायात निरीक्षक
बस अड्डे के आस पास यातायात पुलिस से संवाद कर बैरियर लगवाए गए हैं। प्रयास है कि व्यवस्था में सुधार लाया जाए। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा।
राकेश कुमार, एआरएम सीतापुर डिपो