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Sitapur News: मैं दुर्योधन हूं, मुझे आज्ञा देने का हक केवल समय को है...

Tue, 10 Mar 2026 09:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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मिश्रिख में मंचन करते कलाकार।
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मिश्रिख (सीतापुर)। मेला मैदान में सोमवार देर रात तक महाभारत सीरियल के मुख्य पात्रों में एक दुर्योधन का किरदार निभाने वाले पुनीत इस्सर की आवाज गूंजी। उन्होंने कहा कि मैं दुर्योधन हूं, मुझे आज्ञा देने का हक केवल समय को है और समय मेरे पक्ष में है। मेला महोत्सव में आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी में पुनीत इस्सर की अगुआई में जय श्रीकृष्णा व गीता सार कार्यक्रम हुआ। अभिनेता पुनीत इस्सर व उनके पुत्र सिद्धार्थ इस्सर ने जय श्रीकृष्णा गीता सार के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन और भागवत के उपदेशों को मंच पर साकार किया।
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कार्यक्रम में अभिनेता पुनीत इस्सर ने दुर्योधन, बिंदु दारा सिंह ने भीम और सिद्धार्थ इस्सर ने श्रीकृष्ण का किरदार निभाया। इन कलाकारों ने महाभारत के विभिन्न प्रसंगों के संवादों को भावपूर्ण अभिनय और प्रभावशाली मंच सज्जा के प्रस्तुत किया तो मौजूद दर्शक देर तक तालियां बजाते रहे। पुनीत इस्सर व पूरी टीम ने जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर व उपजिलाधिकारी मिश्रिख अभिनव यादव को महोत्सव आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।



कलाकारों की टीम को जिलाधिकारी व एसडीएम ने स्मृति चिह्न व रुद्राक्ष माला पहनाकर सम्मानित किया। इस मौके पर विधायक रामकृष्ण भार्गव, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला, हिंदू शेर सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास हिंदू, सीओ विशाल गुप्ता, ईओ विंध्याचल, तहसीलदार अजीत जायसवाल आदि उपस्थित रहे।
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राधा-कृष्ण के संवाद से हुआ आगाज

कार्यक्रम की शुरुआत राधा-कृष्ण के संवाद से हुई। जिसमें राधा अपने प्रिय श्रीकृष्ण से शिकायत दर्ज कराते हुए वर्तमान में हो रहे अनाचार से अवगत कराते हुए कहती हैं कि धर्म की स्थापना के लिए महाभारत की कथा सुनानी चाहिए। इस पर भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि भारत के लिए महाभारत का ज्ञान आवश्यक है। फिर महाभारत का चित्रण शुरू होता है।


शक्ति व भक्ति का दिखा अद्भुत संगम

मंचन में दिखाया गया कि महाभारत का युद्ध शुरू होने से पहले, कौरवों ने द्रौपदी को अपमानित करने की कोशिश की। दुशासन ने द्रौपदी की साड़ी खींचने का प्रयास किया तो भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी साड़ी को अनंत बना दिया। इस कारण से दुशासन उन्हें अपमानित नहीं कर सका। द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की शरण में जाकर रक्षा की प्रार्थना की और भगवान ने उनकी रक्षा की।


जयकारों से गूंजा पंडाल

श्रीकृष्ण की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और शांति से ओतप्रोत संवाद, दुर्योधन, भीम, अर्जुन ने अपनी आवाज से मंच पर ऐसी आभा बिखेरी कि पूरा पंडाल जय श्रीकृष्ण के घोष से गूंज उठा। संवाद, गीत-संगीत, नृत्य, वेशभूषा, दृश्य प्रभाव के संयोजन ने प्रस्तुति को और भी मनमोहक बना दिया।
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मिश्रिख में मंचन करते कलाकार।

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