सीतापुर। शहर में कई पुरानी इमारतें जर्जर हैं। इससे बारिश में बदहाल इमारतों के आसपास रहने वाले लोग खौफजदा हैं। कई बार लोगों ने इसकी पालिका प्रशासन से शिकायत भी की। इसके बाद भी पालिका प्रशासन अंजान बना हुआ है।
पिछले चार दिनों रुक-रुककर बारिश का दौर लगातार जारी है।
बारिश से शहर में जलभराव से नागरिकों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं, उससे कहीं अधिक खतरा सैकड़ों साल पुरानी बदहाल इमारतों से है। शहर के मध्य कई पुरानी इमारतें बेहद जर्जर हो चुकी हैं। यह किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
हैरत की बात है कि पालिका प्रशासन के पास यह आंकड़े तक नहीं हैं कि शहर में कितनी पुरानी इमारतें जर्जर हैं। शासन और हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि सैकड़ों साल पुराने ऐसे जर्जर भवन जिनकी वजह से जनहानि का खतरा हो, उन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाए।
इसकी जिम्मेदारी पालिका प्रशासन को सौंपी गई। पालिका प्रशासन इस संवेदनशील मसले पर लापरवाह बना हुआ है। जिला प्रशासन भी इस ओर से आंखें मूंदे है।
श्रम विभाग दफ्तर : कर्मचारियों की जोखिम में जान
शहर के मध्य सैकड़ों साल पुरानी इमारत में श्रम विभाग का दफ्तर संचालित है। इमारत में प्लास्टर टूटकर गिरने लगा है। छत व दीवारें दरकने लगीं हैं। यह जर्जर भवन अब ऐसी हालत में नहीं है कि ज्यादा दिनों तक खड़ा रह सके। यहां काम करने वाले अफसर व कर्मचारियों की जान का हर वक्त जोखिम बना रहता है।
आचार्य नरेंद्र देव की है जन्मस्थली
गुरुद्वारा रोड पर सैकड़ों साल पुरानी इमारत अब बूढ़ी नजर आने लगी है। यह इमारत महान समाजवादी चिंतक व शिक्षाविद आचार्य नरेंद्र देव की जन्मस्थली है। यहां 30 अक्तूबर 1889 को आचार्य का जन्म हुआ था। देखरेख के अभाव में आज यह इमारत बदहाली पर आंसू बहा रही है। संरक्षित नहीं किया गया तो इसका अस्तित्व किसी भी समय खत्म हो सकता है।
पुलिस अफसरों के आवास जर्जर
शहर कोतवाली परिसर में पुलिस अफसरों के कई आवास बेहद जर्जर हैं। इन दिनों जिस इमारत में महिला कोतवाल रहती हैं, वह खस्ताहाल है। इमारत ज्यादा दिनों तक खड़े रहने के काबिल नहीं है। इसमें रहने वालों के लिए हर पल खतरा बना रहता है। मजबूरन पुलिस अफसर इसमें रहते हैं।
आसपास रहने वालों के लिए खतरा
शहर के गुरुद्वारा रोड पर एक सैकड़ों साल पुरानी इमारत है। इस पर आशीष एजेंसी का बोर्ड लगा है। इमारत की हालत ‘अब गिरी, तब गिरी वाली’ है। बारिश में इमारत ढहने का खतरा बढ़ गया है। किसी भी अनहोनी की दशा में इसके आसपास रहने वाले लोगों को भी नुकसान हो सकता है।