विद्यार्थियों ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना का लाभ पाने के लिए हथकंडे अपनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मनमाने तरीके से आय प्रमाण पत्र बनवाए गए। तहसील प्रशासन ने जांच किए बिना प्रमाणपत्र जारी कर दिए।
पिछले दो शैक्षिक सत्र में 10 छात्र-छात्राओं ने जो आय प्रमाणपत्र लगाए, उनमें काफी भिन्नता पाई गई। एक साल में सौ से चार सौ फीसदी तक आय बढ़ गई। आवेदनों की जांच में यह फर्जीवाड़ा खुला।
अब शासन ने इन छात्रों के आय प्रमाण पत्रों की जांच कराने आ आदेश दिया है। लापरवाही किस स्तर पर हुई, इसे भी जांचने को कहा है। यह सभी विद्यार्थी योजना से लाभान्वित हो चुके हैं।
उच्च शिक्षा में मदद के लिए गरीब छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना का लाभ दिया जाता है। इस योजना के तहत विद्यार्थी को छात्रवृत्ति मिलती है। शुल्क प्रतिपूर्ति भी की जाती है।
योजना के तहत वही पात्र होते हैं जिनके अभिभावक की आय दो लाख से कम है। शैक्षिक सत्र 2013-14 व 2014-15 में योजना के तहत जिले के बीए, बीएससी व बीबीए के 10 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनके पहले साल के आय प्रमाण पत्र व अगले वर्ष के इनकम सर्टिफिकेट में 100 से 400 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई।
एक साल में ही आय में बढ़ोतरी का यह मामला शासन स्तर से हुई जांच में पकड़ा गया। जिसके बाद प्रमुख सचिव, समाज कल्याण सुनील कुमार ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर ऐसे आवेदनों की गहनता से जांच कराने का निर्देश दिया।
पत्र में लिखा गया कि इतनी आय बढ़ने से प्रतीत होता है कि तहसील प्रशासन ने आवेदनों की गहनता से जांच नहीं की और बिना जांच के ही आय प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए है। उन्होंने डीएम को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।