मरीज यहां पर डॉक्टर न आने की शिकायतें कर रहे थे। सुबह करीब नौ बजे रेउसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर काफी संख्या में मरीज पहुंच चुके थे।
वहां मौजूद नर्स व वार्ड बॉय मरीजों से कह रहे थे कि डॉक्टर साहब के देखने के बाद ही दवा दी जाएगी। इसी बीच सीडीओ रेउसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए।
पहले तो वहां पर मौजूद स्टाफ कुछ समझ ही नहीं सका, लेकिन जब सीडीओ ने उपस्थिति पंजिका देखी और डॉक्टरों के बारे में पूछताछ शुरू की, तब वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों में हड़कंप मच गया।
पता चला कि न तो वहां पर स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. कमलेश चंद्रा मौजूद हैं और न ही उनके चार अन्य सहयोगी चिकित्सक अस्पताल पहुंचे। दो दिन की छुट्टी के बाद अस्पताल खुला था, उसके बाद भी वहां पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे, यह देख सीडीओ ने नाराजगी जताई।
उन्होंने वार्ड, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की साफ सफाई देखी। मरीजों ने बताया कि सरकारी पर्चे का रेट एक रुपये है, लेकिन यहां पर चिकित्सकों की मनमानी से वह पर्चा दस रुपये का बेचा जाता है।
दवाओं का हाल भी बुरा है, चिकित्सकों को दिखाने के लिए अलग से सुविधा शुल्क देना पड़ता है। सप्ताह में एक या दो बार ही इस स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक आते हैं।
बाकी दिनों के राजिस्टर यूं ही दुरुस्त कर लिए जाते हैं। सीडीओ ने गैर हाजिर चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। चिकित्सकों से स्पष्टीकरण भी तलब किया है।