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मरीजों की गुहार... दर्द सुन लो ‘सरकार’

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जिला अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने पर मरीज को गोद में उठाकर ले जाता तीमारदार। - संवाद - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। हर किसी को बेेहतर इलाज मिले, इसके लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन हकीकत बिल्कुल जुदा है। जिले में सेहत महकमे के हुक्मरान भले ही सब कुछ चुस्त-दुरुस्त होने के दावे करते नहीं थक रहे हों, लेकिन इनके दावों में दम नहीं है। स्याह सच तो यही है कि दिन पर दिन स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी होती जा रही हैं और मरीजों को बेहतर इलाज के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। जिम्मेदारों की मनमानी से मरीज परेशान हैं।
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मंगलवार को जिला अस्पताल में अमर उजाला टीम की करीब एक घंटे की पड़ताल में ये हकीकत सामने आई। अस्पताल में सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है। न सुविधाएं हैं और न संसाधन, फिर भी दावे तमाम किए जाते रहते हैं। ऐसे में डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक की तरफ मदद भरी नजरों से जिला अस्पताल देख रहा है। वह इन दिनों स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर फिक्रमंद नजर आ रहे हैं। ऐसे में जिला अस्पताल को भी उनका इंतजार है। अमर उजाला से बातचीत में कई मरीजों ने गुहार भी लगाई।
दोपहर 12:15 बजे अमर उजाला की टीम जिला अस्पताल पहुंची। गेट से एंट्री कर टीम सीधे इमरजेंसी पहुंची। वहां पर कुछ मरीजों का स्ट्रेचर पर इलाज चल रहा था। इमरजेंसी में बैठे डॉक्टर कुछ मरीजों को देख रहे थे। वहां से टीम इमरजेंसी वार्ड पहुंचती है। इमरजेंसी में दो नंबर बेड पर गंदी चादर बिछी थी। कैमरे का फ्लैश चमकते ही ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मी सकपका गए। टीम यहां से महिला वार्ड पहुंची। सुविधाओं की पड़ताल की गई। गंदी चादरों की समस्या और समय से डॉक्टरों के न देखने की शिकायतें आम रहीं। सर्जिकल वार्ड, पेईंग वार्ड पहुंचकर पड़ताल की गई। गंदगी की समस्या हर जगह दिखी।
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जानवरों से संक्रमण का खतरा
अमर उजाला टीम की पड़ताल के दौरान सर्जिकल वार्ड की तरफ जाने वाले रास्ते से पहले एक रास्ता नई बिल्डिंग की ओर जाता है। इसी के पास सीट पर तीमारदार लेता था। नीचे श्वान लेटा हुआ था। ऐसा तब है, जब गर्मी का मौसम चल रहा है। जानवरों की वजह से संक्रमण हो सकता है।
नहीं मिला स्ट्रेचर
जिला अस्पताल में जरूरत के समय स्ट्रेचर मुहैया हो जाए यह भी किस्मत की बात है। मंगलवार को भी यही दिक्कत देखने को मिली। सर्जिकल वार्ड के पास एक तीमारदार मरीज को गोद में लेकर जा रहा था। पूछने पर बताया कि स्ट्रेचर की काफी देर तक तलाश की, लेकिन मिला नहीं। ऐसे में मजबूरी में मरीज को गोद में लेकर जा रहा हूं।
तो मौके पर काम नहीं आएगा फायर सिलिंडर
जिला अस्पताल के जिम्मेदार यहां की व्यवस्थाओं को लेकर कितना फिक्रमंद है, इसका अंदाजा फायर सिलिंडर से ही आपको लग जाएगा। इमरजेंसी वार्ड से सर्जिकल की ओर जाने पर रास्ते में दीवार पर फायर सिलिंडर टंगा है। सिलिंडर में रिफिलिंग की तारीख 6 अप्रैल 2021 पड़ी थी, जबकि ड्यू डेट ऑफ टेस्टिंग की पांच अप्रैल 2022 है। मामले को बारीकी से समझने के लिए सिलिंडर की फोटो मुख्य अग्नि शमन अधिकारी एनपी सिंह को व्हाट्सएप पर भेजी। उन्होंने बताया कि सिलिंडर की टेस्टिंग की तारीख निकल चुकी है। हो सकता है कि जरूरत पड़ने पर सिलिंडर काम न करे।
सही से बात नहीं करते स्वास्थ्य कर्मी
जिला अस्पताल के अलग-अलग वार्डों में भर्ती कई मरीजों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि स्टाफ सही से बात भी नहीं करता। कोई परेशानी होने पर उनके पास जाते ही फटकारने लगते हैं। अगर सही से स्टाफ और नर्स बात करें तो तीमारदारों और मरीजों का आधा दर्द ऐसे ही दूर हो जाएगा।
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