सीतापुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को कृषि विज्ञान केंद्र कटिया में महिला सम्मान कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसका उद्देश्य जिले में कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही महिलाओं, विशेषकर कृषि सखियों की हौसला अफजाई था। केंद्र की ओर से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली महिलाओं के संघर्ष और सफलता की कहानियों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने की कवायद शुरू की गई।
कार्यक्रम में विभिन्न विकासखंडों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में अतुलनीय कार्य कर रही कृषि सखियों को केंद्र द्वारा सम्मानित किया गया। कृषि सखियों के निर्धारित ड्रेस कोड के अनुरूप उन्हें साड़ियां वितरित की गईं।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव ने बताया कि आज की खेती में महिलाओं की भूमिका केवल श्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अब निर्णय लेने वाली भूमिका में हैं। प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने में कृषि सखियों का योगदान अद्वितीय है। वे न केवल मिट्टी की सेहत सुधार रही हैं, बल्कि समाज को गुणवत्तापूर्ण भोजन देने का संकल्प भी पूरा कर रही हैं।
कृषि सखियों की सफलता की कहानियां राष्ट्रीय पटल पर होंगी प्रकाशित
केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक शैलेंद्र सिंह ने बताया कि सफलता की कहानियों का राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशन होगा। इसके तहत प्रत्येक क्लस्टर में कार्यरत कृषि सखियों के माध्यम से उनके कार्यक्षेत्र में आए गुणात्मक बदलाव और सफलता की कहानियों को जुटाया जा रहा है। इन प्रेरणादायी कहानियों को दस्तावेजीकरण के बाद राष्ट्रीय पटल पर प्रकाशित किया जाएगा, ताकि जिले की इन महिलाओं का मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकें। वैज्ञानिक डॉ. आनंद सिंह ने कहा कि कृषि सखियां प्रयोगशाला और खेत के बीच की सबसे मजबूत कड़ी हैं। सूचनाओं को धरातल पर उतारने में उनका कौशल सराहनीय है।
इन महिलाओं को मिला सम्मान
प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में चयनित पांच महिलाएं नीतू देवी, तारा देवी, ज्योति, राजकुमारी एवं अंजलि को पुरस्कृत किया गया। डॉ. शुभम सिंह राठौर ने भी कृषि सखियों को हर संभव तकनीकी सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में सभी उपस्थित महिलाओं ने आत्मनिर्भर भारत और रसायन मुक्त खेती का संकल्प लिया।