सीतापुर। जीवन में असली उड़ान अभी बाकी है, हमारे इरादों का इम्तिहान अभी बाकी है, अभी तो नापी है बस मुट्ठी भर जमीन, अभी तो सारा आसमान बाकी है...। ये पंक्तियां मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के खिलाड़ियों पर बिल्कुल सटीक बैठती है। हॉकी की स्टिक से विश्वभर में भारत का नाम रोशन करने वाले मेजर ध्यानचंद को अपना आदर्श मानकर खिलाड़ी अपने जिले का नाम रोशन कर रहे है। अपने खेल के दम पर नेशनल प्रतियोगिता तक में हिस्सा ले चुके हैं।
मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में मौजूदा समय में 33 बालक और 07 बालिकाएं हॉकी का अभ्यास करने के लिए नियमित मैदान पर सुबह-शाम पसीना बहा रही हैं। इनमें से नमन मिश्रा व प्रवीण कनौजिया ने नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर जिले का नाम रोशन किया है। इसी तरह से अंडर-17 में ओम नरायन मिश्रा व आदित्य कुमार ने रीजनल मैच में गोल्ड मेडल जीता है। अमन दीप, प्रदीप मयंक ने भी रीजनल मैच खेल चुके हैं। इसी तरह अन्य बालक-और बालिकाएं हॉकी के कोच विवेक सिंह के मार्गदर्शन में प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अभ्यास कर रहे हैं। खिलाड़ी हिमांशु कुमार, सजल और अभय ने बताया कि ध्यानचंद जी हॉकी से किस तरह खेलते थे, हम लोग टीवी और मोबाइल पर उनके खेल देखकर सीख लेते हैं।
भाई-बहन दोनों बहा रहे मैदान पर पसीना
10 वर्षीय कौशिक शुक्ला अपनी सात वर्षीय बहन अपराजिता को स्टेडियम सात लेकर आते हैं। भाई-बहन मिलकर दोनों ही हॉकी का अभ्यास करते हैं। कौशिक का कहना है कि वह ध्यानचंद को आदर्श मानते हैं। इसलिए अपनी बहन को भी वह हाॅकी में ही आगे बढ़ाना चाहते हैं।
बेटियों को खेलने नहीं भेजते हैं अभिभावक
मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में हॉकी की टीम में बालिकाओं की संख्या पिछले साल आठ थी, लेकिन इस बार सात ही रह गई है। ऐसा नहीं कि जिले में हॉकी के प्रति बेटियों की दीवानगी कम है। कोच विवेक सिंह ने बताया कि शाम को कभी-कभी हॉकी का अभ्यास करते-करते सात बज जाता है। कई बार बालिकाओं ने कहा कि स्टेडियम से घर देर से पहुंचने पर अभिभावक डांटते हैं और बेटियों को खेलने के लिए स्टेडियम भेजना ही बंद कर देते हैं।