सीतापुर। होली का पर्व इस बार खास होगा। जिले की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं प्राकृतिक हर्बल रंग-गुलाल तैयार कर रही हैं। महिलाएं पर्यावरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सब्जियों और फूलों का रस निकालकर हर्बल रंग-गुलाल बना रही हैं। इस कलर में कोई भी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। विभिन्न रंगों को पैकिंग कर बेच रही हैं। महिलाओं का कहना है कि जो लोग संपर्क करते हैं, उनको कलर पैक कर भेज दिया जाता है।
मछरेहटा के गोढ़ा की ज्योति महिला स्वयं सहायता समूह की सुनीता, लक्ष्मी, सुनीता चौधरी रविदास, सरोजनी, सुनीता, शमशुल के साथ मिलकर इस होली कुछ खास कर रही है। प्राकृतिक हर्बल कलर तैयार कर रही है। सुनीता ने बताया कि बाजार में केमिकल युक्त रंग-गुलाल मौजूद है, जो कि त्वचा के लिए बहुत ही हानिकारक रहता हैं। केमिकल युक्त रंगों से त्वचा पर दाने और दाग पड़ जाते हैं। इसलिए इस बार सब्जियों और फूलों से रंग तैयार किया जा रहा है।
गुलाबी रंग के लिए चुकंदर और गुलाब की पंखुड़ियां, पीला रंग के लिए हल्दी और गेंदे के फूल, हरे रंग के लिए पालक व मेंहदी के पत्ते, नीले रंग के लिए अपराजिता के फूल और लाल रंग के लिए टेसू के फूलों का इस्तेमाल कर रही हैं। इन रंगों को अलग-अलग पैकिंग कर बिक्री के लिए तैयार हो चुके। सुनीता ने बताया कि तहसील और ब्लॉक स्तर पर इस बार छुट्टियां होने के कारण इन रंगों को मिश्रिख मेला और जिले के विभिन्न अलग-अलग स्थानों पर लगाया जा रहा है। जो लोग फोन से आर्डर देते हैं उन तक भी प्राकृतिक रंग-गुलाल पहुुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।