सीतापुर। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की वायरल लोड जांच ठप हो गई है। इसके पीछे कारण है एक सप्ताह से रिजेंट का अभाव। ऐसे में मरीजों के सैंपल लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजे जा रहे हैं। वहां से जांच रिपोर्ट आने में करीब 15 दिन का समय लग रहा है। इससे मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल से पहले यह रिपोर्ट एक सप्ताह में मिल जाती थी।
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की जांच व इलाज की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है। हेपेटाइटिस की प्राथमिक जांच में पुष्टि होने के बाद वायरल लोड की जांच करवाई जाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही मरीजों का इलाज शुरू किया जाता है। एक सप्ताह से मरीजों की सीतापुर में जांच नहीं हो पा रही है। चिकित्सक सैंपल लेने के बाद लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेज रहे हैं। दो सप्ताह तक रिपोर्ट न मिलने के कारण मरीजों के इलाज में देरी हो रही है।
रोजाना पांच से सात मरीजों के सैंपल भेजे जा रहे हैं। इस समय करीब 30 मरीजों की जांच रिपोर्ट लंबित पड़ी है। इन मरीजों में हेपेटाइटिस की पुष्टि हो चुकी है। इससे मरीजों को काफी परेशानी आ रही है। इसके पीछे अफसर रिजेंट खत्म होने की बात कह रहे हैं।
अचानक बढ़ गया था लैब पर भार
बेहटा के सोनसरी गांव में करीब चार माह पहले हेपेटाइटिस के एक साथ 141 मरीज मिले थे। इसके बाद अचानक लैब पर भार बढ़ गया था। इन मरीजों की इसी लैब से जांच हुई थी। लैब की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तीन माह तक इलाज चला था। अस्पताल प्रशासन का कहना है प्रत्येक माह 100 से 150 मरीजों की वायरल लोड की जांच होती है।
यह होता है रिजेंट
रिजेंट वह रासायनिक पदार्थ या यौगिक है जिसका उपयोग किसी रासायनिक अभिक्रिया को शुरू करने, उसमें भाग लेने या किसी अन्य पदार्थ की उपस्थिति का पता लगाने (विश्लेषण) के लिए किया जाता है। ये तरल होता है। आमतौर पर प्रयोगशालाओं में अनुसंधान, परीक्षण और औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग किए जाते हैं।
क्या होती है कीमत
जिला अस्पताल प्रशासन के मुताबिक एक रिजेंट किट की कीमत करीब 10 हजार के आसपास होती है। एक किट में 10 मरीजों की वायरल लोड की जांच हो जाती है। जिला अस्पताल में यह जांच फ्री में होती है। अगर इसे बाजार में करवाया जाए तो यही जांच 3500 से 4500 रुपये में होती है।
लिखा गया है पत्र
रिजेंट के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। तब तक लखनऊ सैंपल भेजे जा रहे हैं। मरीजों को हेपेटाइटिस का पूरा इलाज दिया जा रहा है।
डॉ. इंद्र सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल