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बाढ़ से हाहाकार, 87 गांव चपेट में

Sat, 05 Aug 2017 10:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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पहाड़ों पर हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी से गांजर में शनिवार को हालात बेकाबू दिखे। घाघरा नदी में आए उफान से 87 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इनमें से 80 गांव रेउसा व सात गांव रामपुर मथुरा क्षेत्र के हैं।
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रेउसा में खेत व सड़कें जलमग्न हैं और घरों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। सबसे भयावह स्थिति पचीसा टापू की है, जहां तीन फीट की ऊंचाई तक सैलाब टापू पर बह रहा है। इससे टापू पर करीब 200 परिवार फंस गए हैं। कई ग्रामीण रात में छप्पर पर गुजर-बसर कर रहे हैं।  लोग घुटनों तक भरे पानी से होकर अपने कामकाज निपटा रहे हैं।

रेउसा के 22 गांव पिछले एक सप्ताह से ही बाढ़ की चपेट में थे। हालांकि इतना पानी नहीं भरा था, जिससे मुसीबत हो। पर शुक्रवार की रात सैलाब तबाही लेकर आया। रातों-रात गांजरी क्षेत्र का एक बड़ा इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया।
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कोनी, दुर्गापुरवा, गोड़ियन पुरवा, रामलाल पुरवा, लोधपुरवा, जैतहिया, मरेली, दर्जिन रेती, कटैला पुरवा, नगीना पुरवा, नई बस्ती, चहलारी, चौकी पुरवा, परमेश्वर पुरवा, खुशी पुरवा, म्योड़ी छोलहा समेत 80 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। हजारों बीघा खेती पानी में डूब गई। सड़कें भी कटान में गुम हो गई।

घरों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। वहीं जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। सैलाब का भयावह रूप देखकर लोगों ने सुरक्षित ठिकानों तरफ पलायन शुरू कर दिया है। रेउसा में सीतापुर-बहराइच हाईवे ही एक ऐसा स्थान है, जो काफी ऊंचा है। इसी वजह से क्षेत्र के बाशिंदे हाईवे का रुख कर रहे हैं।

शनिवार देर शाम तक बहराइच हाईवे ने आबादी का रूप ले लिया था। बाढ़ग्रस्त इलाके में पहुंचे एसडीएम दीपेंद्र यादव भी फंस गए। बाढ़ के आगे मदद के सारे सिस्टम फेल नजर आए। बाढ़ पीड़ित परिवार अपने घरों का सामान सिर पर रखकर पलायन कर रहे हैं। इस क्षेत्र के 20 विद्यालयों में पानी घुस गया है।

रामपुर मथुरा प्रतिनिधि के अनुसार कनरखी, अंगरौरा, पंडित पुरवा, शुक्लन पुरवा समेत सात गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इस क्षेत्र की सैकड़ों बीघा खेती सैलाब में समा गई है। बाढ़ पीड़ित परिवार घरों को छोड़कर निकट बांध का रुख कर रहे हैं। जिसकी वजह से बांध आबादी का रूप लेता जा रहा है।

स्थिति भयावह हो रही है। राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। शनिवार को बैराजों से 387846 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जब यह पानी इस क्षेत्र से गुजरेगा, तो तबाही बढ़ सकती है। प्रशासन के सारे दावे फेल ही नजर आ रहे हैं।
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