नैमिषारण्य(सीतापुर)। गुरुपूर्णिमा का पर्व रविवार को धूमधाम के साथ मनाया गया। नैमिषारण्य में दूरदराज से आए तमाम भक्तों ने सुबह ही अपने गुरुओं के आश्रम में पहुंचकर उनका पूजन किया। दान दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मठ मंदिरों में दिनभर अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहा।
नारदानंद आश्रम में पीठाधीश्वर जगदाचार्य स्वामी देवेंद्रानंद सरस्वती के सानिध्य में सुबह भक्तों ने गुरुदेव भगवान के जयकारे लगाते हुए भव्य शोभायात्रा निकाली। ब्रह्मलीन नारदानंद सरस्वती की समाधि स्थल पहुंचकर गुरुचरण पादुकाओं का पूजन कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद जगदाचार्य स्वामी देवेंद्रानंद सरस्वती शौनक कुटी पहुंचे। जहां स्वामी के भक्तों ने अपने गुरु का पूजन किया। इस दौरान यहां स्वामी ने भक्तों को गुरुपूर्णिमा के महत्व का प्रवचन किया। जीवन में गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। कई श्रद्धालुओं ने स्वामी से गुरुमंत्र लेकर दीक्षा ग्रहण की।
व्यास आश्रम में व्यासपीठाधीश व अनिल शास्त्री के सानिध्य में बड़ी धूमधाम से गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया। दूरदराज से आए भक्तों ने व्यास पीठाधीश्वर का पूजन किया। कई भक्तों ने दीक्षा ली। भंडारा भी हुआ। हनुमान गढ़ी के महंत बजरंग दास व पवन दास के सानिध्य में गुरु पूजन उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर विशाल भंडारा हुआ। कालीपीठ में पुजारी भास्कर शास्त्री द्वारा गोडलेकर महाराज का पूजन किया। पहला आश्रम में महंत नारायण दास नंहकु चरणदास त्यागी के सानिध्य में गुरु पूजन किया गया।
मां ललिता देवी के किए दर्शन
भक्तों ने नैमिषारण्य पहुंचकर सबसे पहले चक्रतीर्थ व गोमती नदी में स्नान कर तीर्थ पुरोहितों को दान किया। पूर्णिमा पर भक्तों ने सत्य नारायण भगवान की व्रत कथा सुनी। मां ललिता देवी और अन्य मंदिरों का दर्शन पूजन किया।
अन्य जगहों पर भी हुए कार्यक्रम
सीतापुर। लहरपुर के प्राचीन शीतला देवी मातन मंदिर मातनपुरवा में आषाढ़ी के दिन नगर एवं दूरदराज से श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और विशेष पूजा अर्चना की। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में एक मेला लगा। इसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए। नगर के उदासीन आश्रम संगत पर गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम विधि-विधान से मनाया गया। संगत के सरवराकार पंकज यादव ने गुरु भगवान श्री चंद्र महाराज का पाटी पूजन, भगवान सत्य नारायण की कथा हुई। इसके बाद आरती हुई।