सीतापुर जिले के गांजरी क्षेत्र में उफना रही नदियाें का पानी मंगलवार को राहत देता नजर आया। जिन गांवों में बाढ़ का पानी भर गया था, वहां भी जलस्तर में कमी रही।
इससे प्रशासन ने तो राहत की सांस ली है, लेकिन तटीय क्षेत्र के ग्रामीण बाढ़ आने की संभावना को लेकर दहशतजदा है। पानी के बढ़ने पर तो ब्रेक लग गया है, लेकिन नदी से कटान तेज होने लगी।
इस कटान को देख तटीय क्षेत्र में बसने वाले परिवारों ने घर छोड़कर रेउसा चहलारी मार्ग समेत अन्य रास्तों पर अपने ठिकाने बनाने शुरू कर दिए हैं।
मारूबेहड़ प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा निर्मल पुरवा, कोनी, फौजदार पुरवा, गोड़ियनपुरवा आदि करीब छह गांवों में घुसा नदी का पानी उतरने लगा है। वहीं क्षेत्र के चंद्रभाल पुरवा, परमेश्वर पुरवा, कोनी, जैतहिया, सिसैया बाजार आदि गांवों में नदी कटान कर रही है।
तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार शारदा के जलस्तर में भी मामूली गिरावट नजर आ रही है, लेकिन पानी इतना कम नहीं हुआ है, जिससे लोग राहत महसूस कर सकें।
काशीपुर के पास बने स्टड अभी भी पानी में डूबे पड़े हैं। क्षेत्र के बड़रिया, बोधवा, बरेला, चंदीभानपुर, काशीपुर में शारदा नदी का पानी तटीय क्षेत्र में कटान कर रहा है।
इस क्षेत्र में पीड़ित परिवार कटान को देख घर व गांव छोड़कर पलायन कर रहे हैं। रामपुर मथुरा प्रतिनिधि के अनुसार इस क्षेत्र मेें भी घाघरा नदी के पानी मेें गिरावट देखने को मिल रही है, लेकिन कटान तेज हो रही है।
अभी एक दिन पहले ही नदी का पानी खतरे के निशान को पार करने को बेताब सा नजर आ रहा था। अब वही पानी आहिस्ता आहिस्ता नीचे खिसक रहा है।
घाघरा नदी फतुल्लापुर, अंगरौरा, कनरखी में अपना भयावह रूप उसी तरह से दिखा रही है, लेकिन पानी नदी की ओर खिसकता नजर आ रहा है।
इस क्षेत्र में नदी ने कटान तेज कर दिया है। जिसकी वजह से खेती योग्य भूमि कटकर नदी में समाती जा रही है। वहीं जिला प्रशासन के मुताबिक बैराजों से 1,40,331 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।