मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कहा कि गांजर को बाढ़ से बचाने के लिए जल्द ही शारदा नदी को गोमती नदी से जोड़ा जाएगा। इससे जहां गांजर इलाके में बाढ़ की समस्या दूर होगी, वहीं लखनऊ के लोगों को पेयजल संकट से राहत मिलेगी। कहा कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा है, लेकिन इसका भी स्थाई हल निकाला जाएगा।
सरकार इसके लिए चिंतित है। वह बुधवार को रेउसा में बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा करने पहुंचे थे। इस दौरान मारूबेहड़ में आयोजित सभा में उन्होंने 20 बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी। मुख्यमंत्री बुधवार को हेलीकॉप्टर से सीधे रेउसा पहुंचे। यहां से करीब 10 किमी. का सफर तय वह सड़क मार्ग से मारूबेहड़ पहुंचे।
यहां मुख्यमंत्री ने आयोजित जनसभा में कहा कि बाढ़ पीड़ितों तक हर हाल में सरकारी मदद पहुंचेगी। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार बाढ़ में इंसान ही नहीं, पशुओं की भी चिंता कर रही है। कहा कि मैं प्रात: काल ही उठकर पीलीभीत, लखीमपुर क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त इलाके का दौरा करते हुए यहां पहुंचा हूं।
उन्होंने विश्वास दिलाया कि पीड़ितों की मदद में धन की कमी किसी भी स्तर पर नहीं आने पाएगी। उन्होंने जिले के अधिकारियों से कहा कि जितना भी धन चाहिए, तत्काल सरकार को लिखे। पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिनके पक्के मकान व झोपड़ियों का नुकसान हुआ है, उन्हें पूरी मदद दी जाएगी।
जिनके घर कट गए हैं, उन्हें जमीन उपलब्ध कराई जाएगी व प्रधानमंत्री आवास का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने 20 लोगों को मंच पर बाढ़ राहत चेक, बाढ़ राहत सामग्री व प्रधानमंत्री आवास के चेक बांटे। इस मौके पर सांसद राजेश वर्मा, विधायक ज्ञान तिवारी, रामकृष्ण भार्गव, महेंद्र यादव, सुरेश राही आदि मौजूद रहे।
दिनेश कुमार, रमेश कुमार, बांकेलाल, रामपाल, पुत्तीलाल, शंकर, मुनेजर, मुन्नीलाल, रमाकांत, राधेश्याम को पुनर्वास भूमि के पट्टे दिए गए। जबकि राकेश, भुसैली, साकल, सोहन लाल, महदेई को घर कटान का 95100 रुपये का चेक दिया गया।
राम लखन, रामेश्वर, चंद्रदेव, मीरा देवी, जैतुन को प्रधानमंत्री आवास का चेक मिला। इसके अलावा प्रत्येक लाभार्थी को बाढ़ राहत सामग्री चावल 30 किलो, 10 किलो आटा, दो किलो अरहर की दाल, 10 किलो आलू, 1 किलो नमक, 6 मोमबत्ती, एक पैकेट माचिस दी गई।
मुख्यमंत्री के रेउसा दौरे की जानकारी प्रशासन को मंगलवार दोपहर हो सकी। मुख्यमंत्री को कोई खामी न मिलने पाए, इसके लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां चलती रहीं। यहां पर जिले भर के सफाई कर्मचारी लगाए गए थे। सभी नगर पालिकाओं के मोबाइल टायलेट लाकर मारूबेहड में लगा दिए गए।
बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी से बाढ़ग्रस्त इलाके में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इलाके के 80 गांव और बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पानी गोबरहिया नाला पार कर रेउसा की तरफ बढ़ते हुए लकड़ी मंडी में पहुंच गया है। इससे रेउसा कस्बे में हड़कंप है। लोग बाढ़ आने की संभावना से भयभीत हैं। उधर, बैराजों से साढे़ तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ऐसे में कस्बे की करीब 40 हजार आबादी दहशत में है।
रेउसा के करीब 500 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। पानी तेज रफ्तार से बढ़ता जा रहा है। रेउसा क्षेत्र के सुकेठा, बसंतापुर, लालपुर, गोडियन पुरवा, शेखनपुरवा, हरीपुर, कटृटू पुरवा, महेशपुर टापर, बनियनपुरवा समेत करीब 80 गांव मंगलवार रात बाढ़ की चपेट में आ गए। वहीं पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। पानी तेज रफ्तार से रेउसा कस्बे की तरफ बढ़ रहा है।
रेउसा कस्बे की लकड़ी मंडी बाढ़ की चपेट में आ गई है। कस्बे के कृष्ण कुमार, अंशुमान, बैजनाथ निषाद, राम गोपाल आदि का कहना है कि पानी जिस रफ्तार से बढ़ रहा है। उसे देखकर लगता है कि एक या दो दिन में बाढ़ का पानी रेउसा कस्बे को अपनी चपेट में ले लेगा। शारदा, घाघरा व बनबसा बैराजों से बुधवार को 3,40,686 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
सीएम की सभा से 300 मीटर दूर घाघरा में नाव पलटी ः रेउसा में बुधवार दोपहर बाढ़ पीड़ितों से भरी एक नाव घाघरा में पलट गई। हालांकि नाव में सवार सभी 15 लोग बाल-बाल बच गए। ये लोग राजापुर कलां से मारूबेहड़ बाजार जा रहे थे। नाव पलटने की सूचना से अधिकारियों में हड़कंप मच गया। रेउसा का ग्राम राजापुर कलां बाढ़ग्रस्त है।
बुधवार दोपहर गांव के हीरालाल, हरिश्चंद्र, रामचंद्र, मिहींलाल, सुशील, ओमकार, संगीता, हसीमुन, हंसराज, बाबूराम, राज, रामू, बच्छराज, संतोष, शत्रोहन लाल एक नाव पर सवार होकर मारूबेहड़ बाजार जा रहे थे। इसी बीच नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। उधर, घाघरा के तेज बहाव में नाव पलटते देख किनारे मौजूद सुरेश, कमलेश, नंगू व यासीन नाव लेकर बचाव को निकल पडे़। हालांकि नाव पर सवार लोगों को तैरना आता था,
इस वजह से सभी तैरकर करीब के ही एक टीले पर पहुंच गए। इसी बीच मदद को निकली नाव भी वहां पर पहुंच गई। कड़ी मशक्कत के बाद लोगों को सुरक्षित टीले पर पहुंचाया गया। कहने को तो बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में बचाव दल तैनात हैं, लेकिन जिस वक्त नाव डूब रही थी, उस समय बचाव दल कहीं पर नजर नहीं आया। वहीं घटनास्थल से महज कुछ ही दूरी पर आयोजित एक जनसभा में मुख्यमंत्री योगी बाढ़ पीड़ितों को बचाने व राहत मुहैया कराने की बात कह रहे थे।