रेउसा (सीतापुर)। पहाड़ों पर भारी बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से घाघरा व शारदा नदियां उफान पर हैं। नदियों के किनारे बसे दस गांव के पास लहरें हिलोरे मार रही हैं। परमेश्वारपुरवा के दो मकान बाढ़ व कटान के मुहाने पर आ गए हैं। कटान का खतरा मंडराता देख गांव वाले रात जागकर काट रहे हैं।
कई गांवों के संपर्क मार्गों पर शनिवार को पानी का तेज बहाव नजर आया। जान जोखिम में डालकर ग्रामीण आवागमन करने को मजबूर हैं। शनिवार को फिर बैराजों से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर बढ़ने से घाघरा रौद्र रूप में नजर आने लगी है।
घाघरा के किनारे बसे खुशीराम पुरवा, परमेश्वरपुरवा, कोनी, मरेली, चौकीपुरवा, फौजदारपुरवा दुर्गापुरवा, दर्जिन रेती, लोधन पुरवा, ताहपुर आदि गांव पानी से घिर गए हैं। सबसे ज्यादा हालात परमेश्वरपुरवा के खराब हैं। यहां के रामअचल व लालजी के मकान के सामने महज पांच फीट की दूरी पर लहरें हिलोरे मार रही हैं।
ग्रामीण सियाराम, खुशीराम ने बताया कि रातभर जागकर लहरें निहारते रहते हैं। हर वक्त डर लगा रहता है कि अचानक पानी गांव के अंदर प्रवेश कर गया तो क्या होगा। कैसे परिवार व जानवरों को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचा सकेंगे। इसी डर से रात में नींद नहीं आती है। रामनिवास व सुरेन्द्र कहते हैं कि परिवार की सुरक्षा के लिए रतजगा करना मजबूरी है।
पानी गांव से बाहर है लेकिन जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो किसी भी समय हालात बेकाबू हो सकते हैं। खेतों, संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है। गांव से निकलते ही चारों तरफ पानी नजर आता है। घुटनों तक पानी में होकर आवागमन करना पड़ रहा है।
हालात पर रखी जा रही नजर
बैराजों से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे जलस्तर कुछ बढ़ा है लेकिन कटान थमने से राहत है। अभी बाढ़ सरीखे हालात नहीं हैं। तटीय क्षेत्र में लगातार नजर रखी जा रही है।
- राजकुमार गुप्ता, तहसीलदार बिसवां