बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से घाघरा के जलस्तर में एक बार फिर से बढ़ोतरी होने लगी है। शुक्रवार रात नदी के जलस्तर में 10 फीट का इजाफा हुआ है। साथ ही नदी ने तटीय क्षेत्र में कटान तेज कर दी है। कटान में यहां की 21 बीघा खेती कटकर नदी में बह गई है।
नदी का रौद्र रूप देख तटीय क्षेत्र में खलबली मच गई है। उधर, बैराजों से सवा दो लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में और इजाफा होने की उम्मीद है। जलस्तर बढ़ने की सूचना मिलते ही एसडीएम बिसवां तटीय क्षेत्र के गांव पहुंचे और स्थिति पर नजर बनाए रखे हैं।
दो दिन पहले ही घाघरा के जलस्तर में कमी आई थी, जिसे देख तटीय क्षेत्र के बाशिंदों ने राहत की सांस ली थी। जिसके बाद गुरुवार रात से नदी के जलस्तर में फिर से इजाफा होने लगा था। शुक्रवार रात जलस्तर तेजी से बढ़ा। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की माने तो शुक्रवार रात नदी के जलस्तर में करीब 10 फीट तक इजाफा हुआ है।
नदी के किनारों से पानी महज 2 फीट ही नीचे है। लोगों का कहना है कि नदी का पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो रविवार सुबह तक तटीय इलाके में दोबारा बाढ़ आ जाएगी। वहीं नदी ने तेजी से कटान शुरू कर दी है। शनिवार रात लोधपुरवा गांव के नरेश, छोटे, मनोहरलाल, भगौती, शिवभगवान, रामनाथ आदि किसानों की 21 बीघा खेती कटकर नदी में समा गई।
इस गांव के मंगरे, रामलखन व सुंदर के घर कटान के मुहाने पर खड़े हैं। नदी यहां से महज 5 कदम की दूरी पर ही बह रही है। नदी का रौद्र रूप देख, तटीय क्षेत्र के लोगों ने घरों को खाली कर दिया है। नदी कोनी, दुर्गापुरवा, गोडिय़नपुरवा, लोधपुरवा, रामलालपुरवा, पासिनपुरवा आदि गांवों के किनारे जबरदस्त कटान कर रही है।
नगीनापुरवा के निकट त्यागी बाबा के आश्रम की जमीन भी कटान भेंट चढ़ रही है। नदी के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव में भी घाघरा का कहर बरप रहा है। उधर, नदी के जलस्तर बढ़ने की सूचना मिलते ही एसडीएम बिसवां दीपेंद्र यादव तटीय क्षेत्र के गांवों में पहुंचे।
यहां पर एसडीएम ने पीड़ितों से मुलाकात की और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया। उधर, घाघरा, शारदा व बनबसा बैराजों से शनिवार को 2,22,112 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस पानी से घाघरा नदी के जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। तटीय क्षेत्र के करीब 22 गांवों में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है।