नहरों और माइनरों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी हालात जस के तस हैं। नहरों में उगी झाड़ियों की वजह से खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जिले में लगभग 150 से अधिक नहरें ऐसी हैं जिनमें टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता। इन नहरों की सफाई में बीते पांच सालों में अब तक आठ करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में छोटी-बड़ी कुल मिलाकर 176 नहरें हैं। इनकी कुल लंबाई 1133 किलोमीटर है। जिले के ज्यादातर किसान सिचाई के लिए इन्हीं नहरों पर निर्भर हैं। बताते हैं कि इस वर्ष नहरों की सफाई के लिए 80 लाख रुपये का बजट आया था।
टेंडर निकाल कर ठेकेदारों के माध्यम से नहरों की सफाई कराई गई। हाल ये है कि अवमुक्त किया गया बजट का सारा धन तो खर्च हो गया लेकिन नहरों की सफाई महज 200 किलोमीटर तक ही हो सकी। क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि सारे धन का बंदरबांट कर लिया गया।
इस समय लगभग 150 नहरें ऐसी हैं जिनमें झाड़ियां उगी हुईं हैं। इनकी आज तक सफाई नहीं की गई। सफाई न होने से इन नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे किसान सिंचाई नहीं कर पाते।
फसलोत्पादन भी प्रभावित होता है। कमलापुर, सिधौली, रामपुर कलां, मानपुर, मिश्रिख, संदना, पिसावां, महोली, हरगांव, लहरपुर आदि क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि नहर सफाई के नाम पर महज रस्म अदायगी की गई है। बीते पांच सालों में नहरों व माइनरों की साफ-सफाई पर अब तक 8 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जा चुका है।
नहरों व माइनरों की सफाई के लिए 80 लाख का बजट पास हुआ है। उससे जिले की 200 किलोमीटर दूरी तक नहरों की सफाई कराई गई है। जो नहरें बची हैं, बजट आने पर जल्द ही उनकी भी सफाई कराई जाएगी।- दिनेश कुमार, अधिशाषी अभियंता