सीतापुर। शहर में कूड़ा एकत्र करने की मुहिम ने महज एक साल में ही दम तोड़ दिया है। अधिकतर मोहल्लों में कूड़ा करकट के ढेर लगे हैं। सप्ताह में एक या दो बार ही कूड़ा गाड़ी आती है। वह भी प्रमुख गलियों के मकानों से कूड़ा लेकर चली जाती है। कई अन्य गलियों के लोग इंतजार ही करते रह जाते हैं। नगर पालिका का दावा है कि 22 वार्डों में कूड़ा कलेक्शन किया जा रहा है। हकीकत में एक भी वार्ड में सही तरीके से कूड़े का कलेक्शन नहीं हो रहा है।
इसकी वजह से शहरवासी खुद ही डस्टबिन व खुले स्थानों पर कूड़ा डालने को मजबूर हो रहे हैं। नगर पालिका की तरफ से घरों से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए सूखा व गीला कूड़ा अलग-अलग एकत्रित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। शहरवासियों के घर से ही कूड़ा उठाने के लिए डोर-टू-डोर कलेक्शन की व्यवस्था करीब एक साल पहले शुरू की गई थी।
शुरुआत में सात वार्डों में ट्रायल किया गया था। जब यह ट्रायल सफल हो गया तो इसका दायरा बढ़ाकर 22 वार्डों में कर दिया गया था। इसके बावजूद शहर के अभी आठ वार्डों में कलेक्शन व्यवस्था शुरू होना बाकी रह गई थी। जिन 22 वार्डों में यह व्यवस्था शुरू हुई थी अब एक साल के अंदर ही दम तोड़ रही है।
इन वार्डों के बाशिंदों का कहना है कि शुरुआत में ठेका कंपनी के कर्मचारी सुबह ही घर पर आ जाते थे और सूखा व गीला कूड़ा अलग-अलग लेते थे। इससे खुले में कूड़ा डालने की जरूरत नहीं होती थी। यह व्यवस्था अधिक दिनों तक टिक नहीं सकी है। अब हालात विपरीत हो गए है। कलेक्शन कर्मी सप्ताह में एक या दो बार ही आते है। मोहल्ले के प्रमुख गलियों से ही कूड़ा कलेक्शन कर लेते है। अगर कोई संकरी गली में रह रहा है तो उसके घर नहीं पहुंचते है। इससे इन गलियों के लोग खुले स्थान पर कूड़ा डालते हैं। इसकी वजह से शहर में जगह-जगह पर गंदगी फैली हुई है।