लालबाग के राजा को पंडाल में ले जाते भक्तगण।
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इस बार गणेश चतुर्थी की छटा देखते ही बन रही है। शहर में तो गणपति यात्रा व दरबारों की धूम मची हुई है। आस्था का सैलाब सड़कों से लेकर घरों तक उमड़ रहा है। किसी ने घर में गणपति को स्थान दिया है, तो किसी ने पंडाल में गणपति भगवान का दरबार सजा रखा है। माहौल इतना भक्तिमय कि ऐसा लग रहा है कि घर घर में पधारे हैं गजानन जी। आरती वंदना और शंख ध्वनि से जिला गूंजता नजर आ रहा है।
यूं तो गणेश चतुर्थी को लेकर शनिवार से ही तैयारियां तेज हो गई थीं। भगवान गणेश जी की प्रतिमा लाने के लिए लोग लखनऊ रवाना हो गए थे। देर रात तक विभिन्न आकारों की प्रतिमाएं जिले में आ भी गईं।
जिसके बाद दोपहर होते ही पंडालों को सजा दिया गया। प्रतिमा को स्थान देने के लिए गाजे-बाजे के साथ लोग गणेश यात्रा पर निकल पड़े। डीजे, बैंड बाजा व भांगड़े की ध्वनि पर नाचते गाते श्रद्धालु गणेश यात्रा को शहर के प्रमुख मार्गों से निकाल रहे थे।
पंडाल पर पहुंचते ही मंत्रों के स्वर गूंजने लगते थे। मंत्रोच्चारण व विधि विधान से पूजा अर्चना के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा को घरों व पंडाल में स्थान दिया जा रहा था। हर जगह गणपति भगवान का दरबार इस अंदाज में सजाया जा रहा था कि उनके सामने श्रद्धालु आसानी से आ सकें और पूजा अर्चन कर सकें।
यहां सबसे ऊंची प्रतिमा लालबाग के राजा की है, जिसकी ऊंचाई करीब 7 फीट बताई जा रही है। जबकि होली नगर में महाराष्ट्र का परिवार चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसने करीब 30 वर्ष पहले यहां पर गणेश दरबार की नींव रखी थी। वहां पर करीब 6 फीट ऊंची प्रतिमा विराजित की गई हैं।