जिले में घाघरा व शारदा नदी का कहर जारी है। खासकर घाघरा नदी गांजरी क्षेत्र के बाशिंदों के लिए अभी से ही मुसीबत बन गई है। रामपुर मथुरा क्षेत्र में घाघरा नदी ने फतुल्लापुर गांव का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया है।
वहीं निकट की 100 बीघा खेती भी नदी में समा गई। रेउसा क्षेत्र में भी घाघरा नदी कहर बरपा रही है। कोनी व फौजदार पुरवा के सात घर कटकर नदी में बह गए हैं।
कटान अब भी जारी है। गांव के लोग घरेलू सामान बटोरकर पलायन कर रहे हैं। तंबौर क्षेत्र में शारदा नदी कटान कर रही है। लहरपुर से लेकर रामपुर मथुरा क्षेत्र तक ग्रामीण बाढ़ आने की संभावना से परेशान हैं।
रामपुर मथुरा में घाघरा नदी पूरे उफान पर है। उसका कहर तटीय क्षेत्रों पर टूट रहा है। क्षेत्र के फतुल्लापुर में बीते वर्ष बाढ़ के बाद महज राम नरेश, कल्लू, तिलक, त्रिभुवन व मायाराम के पांच घर बचे थे।
बीते दो दिनों में घाघरा नदी ने कटान करते हुए इन पांचों घरों को अपनी आगोश में ले लिया है। बहरहाल नदी का रौद्र रूप देखकर इन घरों में रहने वाले परिवार पहले ही घरों को खाली कर पलायन शुरू कर चुके थे।
करीब 56 परिवारों की आबादी वाला गांव अब घाघरा नदी में समा चुका है। कल जहां पर आबादी बसी थी, वहां पर पानी हिलोरे मार रहा है।
वहीं नदी तेजी से कटान करते हुए आगे बढ़ रही है। माना जा रहा है कि अब तक नदी करीब 100 बीघा खेती की जमीन निगल चुकी है। हालांकि प्रशासन ने इस बारे में अभी चुप्पी साध रखी है।
तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक प्रशासन की ओर से बाढ़ जैसी संभावना की कोई चेतावनी नहीं जारी हुई है। रेउसा व मारूबेहड़ में घाघरा तबाही का सबब बनी हुई है।
मंगलवार की रात नदी ने कोनी गांव के जंग बहादुर, विजय, हरेराम व फौजदार पुरवा के मनोहर, संतराम, छोटकू व बड़कन्नू के घर निगल लिए हैं। कटान अब भी जारी है।
क्षेत्र के निर्मल पुरवा, महंतपुरवा, बरार, टिब्भा, सिसैया, दरियाना, रामलाल पुरवा आदि गांवों में नदी तेजी से कटान कर रही है। इन गांवों में बसने वाले परिवारों ने पलायन शुरू कर दिया है। ये परिवार जगह न मिलने पर क्षेत्र के संपर्क मार्गों व सड़कों पर झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं।
यहां भी ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने अभी बाढ़ जैसी कोई चेतावनी नही दी है। तंबौर क्षेत्र में घाघरा नदी ने भय का माहौल पैदा कर रखा है।
शारदा नहर असईपुर, मल्लापुर, काशीपुर, गोड़ियन पुरवा, बढ़हिन पुरवा, बोधवा, चंदीभानपुर आदि गांवों के निकट कटान कर रही है। ग्रामीण भी सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर रहे हैं।