रामपुर मथुरा। बाढ़ और कटान से हर साल बड़े पैमाने पर कृषि योग्य भूमि व फसलों का नुकसान होता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते आठ वर्ष में करीब 3700 हेक्टेयर फसलें बाढ़ ने तबाह कर दीं। कई किसानों की जमीनें कटकर नदी में समा गईं। इनमें तमाम ऐसे लोग हैं जो जमीन कटने से भूमिहीन हो गए हैं। कभी अपनी जमीन पर खेती करने वाले ये लोग जीवन यापन के लिए अब मजदूरी कर रहे हैं।
सरयू नदी में उफान आने से हर साल बारिश के सीजन में बाढ़ तबाही मचाती है। बेकाबू लहरें कई परिवारों की तकदीर बदल देती हैं। खेत बाढ़ में बह जाने से कई लोग भूमिहीन हो जाते हैं। पंडितपुरवा के कृष्ण नारायण ने बताया कि करीब पांच साल पहले वह पांच एकड़ जमीन के मालिक थे। चार लोगों का खुशहाल परिवार था। सरयू नदी की बाढ़ व कटान में सारी जमीन चली गई। भूमिहीन होने के बाद परिवार का पेट पालना मुश्किल हो गया। अब बंटाई पर खेत लेकर गुजर-बसर कर रहे हैं।
फतुल्लापुर निवासी रामनरेश अपनी बर्बादी की दास्तान बताते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि 20 बरस पहले वे 150 बीघा जमीन के मालिक थे। उस समय घर में पांच से छह नौकर थे। ठाठ से जिंदगी कट रही थी। बाढ़ व कटान में दो से तीन साल के अंतराल में सारी जमीन चली गई। अब जीवन मजदूरी पर निर्भर हो गया है। बेटा दुकान पर नौकरी कर रहा है। उससे परिवार चल रहा है।
पंडितपुरवा के राजेश कुमार भी अपनी 20 बीघा कृषि योग्य भूमि बाढ़ में गंवा चुके हैं। अब दूसरे प्रांत में एक कंपनी में नौकरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। अवध नरेश के घर का खर्च भी 30 बीघा जमीन गंवाने के बाद मजदूरी से चल रहा है।
नुकसान की तुलना में मुआवजा नाकाफी
बाढ़-कटान से होने वाले नुकसान की तुलना में मुआवजा नाकाफी है। कटान पीड़ितों ने बताया कि सरकार खेती योग्य भूमि कटने पर प्रति हेक्टेयर 47,500 रुपये (करीब चार हजार रुपये प्रति बीघा) मुआवजा देती है। फसल नष्ट होने पर प्रति बीघा लगभग 1,400 रुपये की दर से अनुदान दिया जाता है। यह वर्तमान समय में महंगाई के हिसाब से बेहद कम है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समय यहां प्रति बीघा भूमि की कीमत करीब दो से ढाई लाख रुपये है। मुआवजे की राशि कुछ इस प्रकार दी जाए ताकि जितनी भूमि नदी में कट जाए उसकी एक चौथाई भूमि तो पीड़ित खरीद सके।
सर्वे के बाद पीड़ितों को दिया जाता अनुदान
बाढ़ व कटान के दौरान भूमि कटने पर प्रति हेक्टेयर 47,500 रुपये अनुदान देने का प्रावधान है। फसल नुकसान होने पर सिंचित क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर 17,500 रुपये व असिंचित की दशा में 13,500 रुपये अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। सर्वे होने के बाद यह अनुदान दिया जाता है।
- उमाशंकर त्रिपाठी, तहसीलदार महमूदाबाद