रामपुर मथुरा/तंबौर। जिले के गांजरी इलाके में सरयू व शारदा नदियों का जलस्तर घटा है, लेकिन बाढ़ के हालात जस के तस बने हैं। रामपुर मथुरा क्षेत्र के परमगाेंडा में तीन घर कटान की कगार पर हैं। तंबौर का कोल्हुआपुरवा लहरों के निशाने पर है। कटान से डर से यहां लोग अपना मकान तोड़कर सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं। आबादी से लेकर खेतों तक कटान जारी है। उधर, बैराजों से शनिवार को 3 लाख 64 हजार 343 क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है।
रामपुर मथुरा से लेकर तंबौर इलाके तक शारदा व सरयू नदियां कहर बरपा रही हैं। रामपुर मथुरा क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर शनिवार को 118.40 मीटर दर्ज किया गया। शुक्रवार की तुलना में पानी 40 सेमी घटा है। सरयू अब खतरे के निशान 119 मीटर से 60 सेमी नीचे बह रही है। जलस्तर में कमी आने के बावजूद में हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं।
अंगरौरा, निरंजन पुरवा, बलेसर पुरवा, अखरी, बाबाकुटी, अटौरा, कनरखी, केवड़ा, शुकुल पुरवा, बगस्ती, बंगालीघाट, धांधी रेती, खुन्ना पुरवा समेत 15 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। निरंजन पुरवा, अंगरौरा, बाबाकुटी, प्यारे पुरवा के हालात ज्यादा खराब हैं। इन गांवों के अंदर रास्तों से लेकर घरों तक में बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
यहां के मिश्री, टहलू, कैलाश, देवरिया, रामू, हरी प्रसाद, रमदेई, बिंदु, राकेश, शिव मंगल, सोहन, देवरिया, बिंदु आदि तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। परमगोंडा गांव कटान से प्रभावित है। इस गांव में नंदू, जगतराम, प्रमोद, शिवराम, शिवनाथ, तूफान, इंदल, सुरेंद्र, श्यामा, लवलेश समेत कुल 27 घर हैं। जिसमें शिवराम, सुरेंद्र तथा प्रमोद का घर नदी के कटान की कगार पर है। कई गांवों में नाव से आवागमन करना पड़ रहा है।
महमूदाबाद एसडीएम ने बाढ़ प्रभावित गांवों तथा तटबंध का निरीक्षण किया। नाव से परमगोंडा गांव पहुंचकर कटान प्रभावित परिवारों से मिलकर मदद करने का आश्वासन दिया।
तंबौर में देवपालपुर के मजरा कोल्हुआपुरवा से नदी की धारा कटान करते हुए करीब आ पहुंची है। आबादी से लहरें महज 6 मीटर दूर है। सिंचाई विभाग द्वारा अभी तक बताया गया सेफ जोन अब डेंजर जोन में आ गया है। शारदा नदी के कटान के खौफ से भयभीत कोल्हुआ पुरवा के ग्रामीण जेसीबी से अपना मकान तोड़वा रहे हैं। मलबा व गृहस्थी समेटकर सुरक्षित ठिकाने की ओर जा रहे हैं। रामभूषण, अरुण, महदेई, अंकित, संतोष, सर्वेश व सोहन ने बसंतापुर व देवपालपुर के सचिवालय में शरण ली है। यहां के ग्रामीणों का आरोप है कि जिस तरह नदी का कटान जारी है एक दो दिन में गांव का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। लेखपाल विक्रम सिंह ने बताया कि रोजाना सुबह शाम सभी परिवारों को भोजन के पैकेट दिए जा रहे हैं। शनिवार को तीनों बैराजों से करीब 3,64,343 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे हालात और बिगड़ने की संभावना जताई जा रही है।
राहत सामग्री बांटने के निर्देश
बाढ़ व कटान प्रभावित गांवों के लिए तिरपाल, लंच पैकेट, टॉर्च तथा जानवरों के लिए भूसा वितरण करने के लिए निर्देशित किया गया है। कटान प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी। राजस्व विभाग की टीम गांव में रुककर नजर रखने के लिए गठित कर दी गई है।
- शिखा शुक्ला, एसडीएम महमूदाबाद