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सरयू की लहरों के निशाने पर आए परमेश्वरपुरवा के 40 घर

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सीतापुर। बाढ़ के बाद गांजर वासी अब कटान का दंश झेल रहे हैं। रेउसा इलाके में रविवार को लगभग 60 बीघा कृषि योग्य भूमि सरयू नदी की कटान की भेंट चढ़ गई। परमेश्वरपुरवा की ओर बढ़ रही बेकाबू लहरों ने करीब 40 मकानों को निशाने पर ले लिया है। दहशतजदा ग्रामीण अपने आशियाने उजाड़ कर गांव से पलायन करने को मजबूर हैं।
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वहीं, रामपुर मथुरा इलाके में नदी का जलस्तर स्थिर होने से लोग एक बार फिर बाढ़ की आशंका से सिहर उठे हैं। रविवार को ब्लॉक रेउसा के बाढ़ प्रभावित गांव परमेश्वरपुरवा में तमाम लोग अपना आशियान उजाड़ने में जुट गए। एक-दूसरे की मदद से ग्रामीण अपनी गृहस्थी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने लगे हैं। दरअसल, नदी कटान करती हुई आबादी की तरफ बढ़ी चली आ रही है।
यहां के लालजी, सत्यपाल, विक्रम, राम सिंह, बाबादीन, राम गोपाल, पेशकार, देशराज, सियाराम, भगौती, निर्मल, रामचंद्र, रामशंकर समेत करीब 40 लोगों के मकानों से नदी महज 20 से 35 मीटर दूर तक आ पहुंची है। कटान का खतरा देख किनारे रहने वाले रामअचल, सतीश, दुखहरन आदि अपने पक्के मकान खुद तोड़कर पलायन करने लगे हैं। यह लोग परमेश्वरपुरवा और चौकीपुरवा मे मध्य ऊंचे स्थान पर डेरा डाल रहे हैं। वहीं, नदी का बहाव लगातार जमीन का कटान भी कर रहा है।
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शनिवार की रात से रविवार की शाम तक लगभग 60 बीघा कृषि वाली भूमि फसल समेत सरयू में समा गई। लोगों में कटान रोकने के लिए प्रशासन द्वारा कोई प्रयास नहीं किए जाने पर गहरा रोष व्याप्त है। दूसरी तरफ, रामपुर मथुरा क्षेत्र अंतर्गत फत्तेपुरवा में लगे मीटर गेज पर रविवार को सरयू नदी का जलस्तर 118.30 मीटर रहा। जलस्तर ठहरने से तराई के बाशिंदों की धड़कने फिर तेज हो रही हैं। दरअसल, पिछले दिनों जलस्तर स्थिर होने का बाद अचानक भीषण बाढ़ की त्रासदी झेलनी पड़ी थी।
रेउसा में तेजी से हो रही कटान को देखते हुए लोग अपनी धान और गन्ने की हरी फसल काट रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटान में खेत के साथ फसल भी डूब जाएगी। फसल का नुकसान होना ही है तो कम से कम इसे काटकर जानवरों के लिए कुछ दिन चारे का इंतजाम हो जाएगा।
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तहसीलदार बिसवां राजकुमार गुप्ता ने बताया कि तेज कटान की जानकारी नहीं है। दौरा कर लोगों की हर संभव मदद की जाएगी। लेखपालों से नजर रखने को कहा गया है।
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