रेउसा (सीतापुर)। जिले के गांजरी इलाके में उफनाई घाघरा से बाढ़ सरीखे हालात बन गए हैं। कई गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है। ग्रामीण पानी में होकर आवागमन करने को विवश हैं। गांवों के अंदर पानी पहुंचने की आशंका से ग्रामीण सहमे हैं। गुरुवार को जलस्तर स्थिर रहने से कटान तेज हो गई।
तटीय क्षेत्र की 21 बीघा खेती योग्य जमीन नदियों में समा गई है। पहाड़ों पर होने वाली बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से घाघरा व शारदा नदियां उफान पर हैं। नदियों का पानी अपने दायरे से बाहर निकलकर आबादी की ओर रुख कर चुका है।
गुरुवार को फौजदारपुरवा, लोधपुरवा, दुर्गापुरवा, कोनी, ताहपुर आदि गांवों के संपर्क मार्गों पर नदी का पानी हिलोरे मारता नजर आया। इन गांवों के बाशिंदे पानी में होकर आवागमन को मजबूर हैं। इससे खतरा भी बना रहता है। बिल्लरपुरवा, मरेली, जैतहिया, परमेश्वरपुरवा, चौकीपुरवा इत्यादि गांवों के करीब घाघरा की बेकाबू लहरें पहुंच गई हैं।
गांवों के अंदर पानी नहीं पहुंचा है लेकिन तटीय इलाके में रास्तों पर पानी भरने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। गुरुवार को जलस्तर स्थिर रहने से कटान भी तेज हो गई। मेवड़ी छोलहा के मुल्लू की पांच बीघा तथा लालजी की छह बीघा खेती वाली जमीन शारदा नदी निगल गई।
वहीं, शारदा व घाघरा के संगम वाली जगह ताहपुर निवासी कृष्णाकांत की पांच बीघा और मिश्री की पांच बीघा जमीन नदी में समा गई। ग्रामीणों के मुताबिक बैराजों से छोड़ा जाने वाला पानी के कारण किसी भी वक्त फिर से जलस्तर बढ़ सकता है।
लेखपालों व ग्रामीणों को किया अलर्ट
बिसवां एसडीएम शिशिर कुमार ने गुरुवार को गांजरी इलाके का दौरा कर हालातों का जायजा लिया। एसडीएम ने चहलारी घाट, फौजदारपुरवा तथा कोनी गांव पहुंचकर स्थिति देखी। क्षेत्रीय लेखपालों व ग्रामीणों को अलर्ट रहने को कहा। एसडीएम के मुताबिक अभी बाढ़ सरीखे हालात नहीं हैं।