घाघरा नदी के बाढ़ के पानी ने एक बार फिर से आबादी की
ओर रुख कर लिया है। बुधवार दोपहर बाद पानी तेजी से आबादी की ओर बढ़ चला।
शाम तक क्षेत्र के तीन प्रमुख मार्गों को बाढ़ के पानी ने अपनी चपेट में ले
लिया था।
करीब 18 गांव नदी के निशाने पर हैं। वहीं कटान से चार घर
कटकर नदी में समा गए हैं। इस मुसीबत से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
कारण यह है कि बैराजों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।
बुधवार को
भी दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। यह पानी नदी में इजाफा करेगा
और बाढ़ जैसे हालात को जन्म देगा। रेउसा क्षेत्र के सिसैया बाजार निवासी
गुड्डू, ललित, ब्रम्हादीन व कलामू के घर बुधवार को कटकर घाघरा नदी में समा
गए।
इन घरों में रहने वाले परिवार नदी का रौद्र रूप देखकर पहले से
ही सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर चुके हैं। परिवार मौजूद न होने के
कारण जनहानि का खतरा टल गया। एक दिन पहले ही इस क्षेत्र से बाढ़ का पानी कम
हुआ है।
बुधवार की दोपहर घाघरा नदी ने फिर से विकराल रूप लेना
शुरू कर दिया। आबादी की ओर पानी बढ़ रही है। बाढ़ के पानी ने लोध पुरवा व
जंगल टपरी जाने वाले मार्ग पर करीब चार सौ मीटर की दूरी तक मार्ग को अपनी
चपेट में ले लिया है।
पानी की धार इस कदर तेज थी कि साइकिल और अन्य
वाहन चालक उधर से गुजरने की हिम्मत न जुटा सके। इसी क्षेत्र के करीब आठ और
रास्तों पर घाघरा नदी की बाढ़ का पानी बह रहा था। खेतों से गांव की ओर आने
वाले गलियारे नाले का रूप लेते नजर आ रहे थे।
इन्हीं गलियारों से
पानी तेजी से तटीय क्षेत्र की आबादी की तरफ बढ़ रहा था। निर्मल पुरवा,
महंतपुरवा, गोडिय़न पुरवा, सिसैया बाजार, कोनी, जैतहिया, मरेली, पासिन
पुरवा, नगीना पुरवा, कबड़ियन पुरवा आदि गांवों की आबादी बाढ़ के पानी से
घिरती नजर आ रही थी।
सिसैया बाजार के पप्पू ने बताया कि जिस हिसाब
से घाघरा उफना रही है, उससे 18 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
ये वही गांव हैं, जो एक दिन पहले बाढ़ के पानी से निजात पा चुके थे। घाघरा
के बढ़ते जलस्तर को देख, ग्रामीण बाढ़ को लेकर भयभीत हैं।
इस
क्षेत्र में प्रशासन की मदद नजर नहीं आ रही है। रामपुर मथुरा क्षेत्र के
ग्राम शुकुल पुरवा, अंगरौरा, कनरखी क्षेत्र में बाढ़ का पानी बढ़ता जा रहा
है। अभी नदी ने तटीय क्षेत्र के खेतों को अपनी चपेट में लिया है।