बच्चें के परिवारीजन भी भयभीत हैं। दूसरी तरफ विभिन्न बैराजों से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। नदी के जलस्तर में कमी होने की संभावना नजर नहीं आ रही है।
रेउसा क्षेत्र के जंगल टपरी, दूलामऊ व रामलाल पुरवा प्राथमिक विद्यालयों में घाघरा का पानी भर गया है। इस वजह से तीनों स्कूलों की पढ़ाई बंद है। अभिभावकों को स्कूल परिसर में पानी भरने से बच्चों को वहां भेजने में डर लग रहा है।
ज्यादातर अभिभावकों ने बच्चों की स्कूल जाना बंद करा दिया। इसके अलावा घाघरा नदी का पानी रामलाल पुरवा, कोनी, सिसैया बाजार, पासिन पुरवा, गोड़ियन पुरवा, निर्मल पुरवा समेत 12 गांवों में भरा हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि चार फिट तक पानी भर गया है। इसमें 10 से 12 वर्ष तक के बच्चों डूबने का खतरा है। ग्रामीण पानी से घिरे अपने मकानों को लेकर भी चिंतित हैं। पक्के मकानों में रहने वाले लोगों ने सामान छत पर रख लिया है।
छप्पर व कच्चे मकानों में रहने वालों को पलायन करना पड़ा है। घाघरा नदी के तटीय क्षेत्र से इस बारिश में अब तक लगभग 300 परिवार घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर जा चुके हैं। इनमें ज्यादातर ने क्षेत्र की सड़कों पर डेरा जमा रखा है।
दर्जन भर गांवों में पानी भरने से आवागमन बंद हो गया है। उन्हें मकान तक जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। जलभराव के कारण जानवरों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है।
उधर नगीना पुरवा, जैतहिया समेत दर्जन भर अन्य गांवों में बाढ़ का खतरा है। पानी बढ़ने पर तटीय क्षेत्र की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। रामपुर मथुरा क्षेत्र में भी घाघरा का रूप विकराल होता जा रहा है।
इस क्षेत्र में अभी गांव तो बाढ़ की चपेट में नहीं आए लेकिन पानी बढ़ने गति देख छह गांवों के लोग परेशान हैं। दूसरी तरफ शारदा, घाघरा व बनबसा बैराज से 167073 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है।