इमलिया सुल्तानपुर (सीतापुर)। गन्ने व सरसों की फसल कटने वाली है। गेहूं में बाली आने से फसल को सिंचाई की जरूरत है, लेकिन बाघ की दहशत के चलते किसानों को मजदूर नहीं मिल रहे हैं। खेती-किसानी चौपट होेने की आशंका से किसान चिंतित हैं। वन विभाग ढाई माह से न बाघ की लोकेशन का पता लगा पा रहा और न पकड़ पा रहा है। लोगों में रोष इस बात को लेकर है कि बाघ सबको दिख रहा है तो वन विभाग को क्यों नहीं नजर आता है।
सीतापुर और हरगांव रेंज में बाघ ढाई माह से चहलकदमी कर रहा है। बाघ ने नवंबर में हरगांव रेंज के चांदुपुर में आमद दर्ज कराई थी। तब से लेकर अब तक भूख लगने पर शिकार करता है। कभी खेत तो कभी रास्ते में ग्रामीणों को नजर आता है। पगचिह्न भी लगातार मिल रहे हैं। गत रविवार को सीतापुर रेंज के हाता में किसानों ने बाघ देखने का दावा किया। मोबाइल से फोटो भी खींचा। दूर से खींची गई फोटो स्पष्ट न होने से वन विभाग ने उसे बाघ मानने से इंकार कर दिया, लेकिन पगचिह्न मिलना इस बात का प्रमाण है कि बाघ इलाके में ही मौजूद है। बाघ के डर से खेती-किसानी चौपट हो रही है। बिशुनपुर निवासी किसान रघुनंदन ने बताया कि गन्ने व सरसों की फसल कटने लायक है। मजदूर खेत पर जाने से कतरा रहे हैं। त्योहार नजदीक है, ऐसे में फसल नहीं काट पाए तो त्योहार कैसे मनाएंगे। रामलखन ने बताया कि सरसों की फसल तैयार है। काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। पास में ही गेहूं का खेत है, जिसमें पानी लगना जरूरी है। उसी खेत के करीब बीते रविवार को बाघ देखा गया है, जिसके बाद कोई भी मजदूर काम करने को राजी नहीं हो रहा है। ऐसे तो फसल खेत में ही खराब हो जाएगी।