चार माह में दो मौतों से बुरी तरह टूट चुके परिवार ने प्रशासन की बेरुखी देख किसान मंच की मदद से सीएम से मुलाकात का प्रयास किया है। किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष ने पीड़ित परिवार का दर्द पत्र के जरिए राज्यपाल व मुख्यमंत्री तक पहुंचाया है।
किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा कि वह पीड़ित परिवार को न्याय व मदद दिलाने को प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए राज्यपाल व मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
बताया कि शहर कोतवाली क्षेत्र के नरही गांव निवासी किसान उमेश ने बर्बाद फसल का मुआवजा न मिलने व कर्ज की किस्त जमा न होने पर बैंक का नोटिस आने पर हताश होकर 10 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उमेश पर सहकारी बैंक का 37 हजार रुपये कर्ज था।
उमेश की आत्महत्या के बाद परिवार में उसकी पत्नी राजेश्वरी व पांच पुत्र बचे। मृतक के पांच पुत्रों में सबसे बड़ा दिनेश (21) था। दिनेश से छोटा दीपक (17) सुनने-बोलने में असमर्थ है। इसके अलावा अमित (15), मोहित (12) व नितिन (10) अभी छोटे हैं।
विगत 8 सितंबर को आर्थिक तंगी से परेशान व धान की फसल सूखती देख उमेश के बड़े पुत्र दिनेश ने भी फांसी लगाकर जान दे दी। अब परिवार में वृद्घ राजेश्वरी व उसके चार नाबालिग बेटे ही बचे हैं। परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
परिवार दाने-दाने को मोहताज है। जबकि प्रशासन इन मौतों की वजह आर्थिक तंगी मानने को राजी नहीं है। अफसर इस कदर संवेदनहीन हैं, कि मदद तो दूर किसी ने गांव जाकर पीड़ित परिवार का दुख-दर्द बांटने की जहमत उठाना तक मुनासिब नहीं समझा।
राज्यपाल व मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में किसान मंच ने पीड़ित परिवार को ऐसा रास्ता सुझाने की अपील की है, जिससे परिवार अपने पैरों पर खड़ा होकर गुजर-बसर कर सके। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने की संस्तुति भी मांगी गई है।