सीतापुर। कासगंज जिले में भले ही एक शिक्षिका का फर्जीवाड़ा सामने आया है। लेकिन जिला सीतापुर में पिछले तीन साल में 15 फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके है। इन फर्जी शिक्षकों की एसटीएफ, एसआईटी व जिला प्रशासन अपने स्तर से जांच करा रहा है। यानी तीन स्तर पर बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षकों के अभिलेख खंगाले जा रहे है।
अगर यह जांच सही दिशा में चलती रही तो जिले में और भी तमाम शिक्षक सामने आएंगे, जिन्होंने कूट रचित तरीके से शिक्षक की नौकरी हथियाई है। अगर जब शासन ने सभी शिक्षकों की जांच कराने का एलान किया है तो इसका असर जिले में करीब 15 हजार शिक्षकों पर पड़ेगा। इससे बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है।
कासगंज जिले में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की एक शिक्षिका फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी करते हुई पकड़ी गई है। अब इस शिक्षिका के सहारे पूरे प्रदेश में शिक्षिकाओं का फर्जीवाड़ा रोजाना सामने आ रहा है। अगर सीतापुर की बात की जाए तो यहां पर भी कम फर्जी शिक्षक नहीं है। अगर पिछले तीन बरस की बात की जाए तो 15 शिक्षक फर्जी मिल चुके है।
इससे पहले प्रदेश में प्राथमिक विद्यालय में फर्जी अंकपत्र के सहारे शिक्षक पद की नौकरी हासिल करने का मामला मथुरा जिले से सामने आया था। उस समय अधिकतर फर्जीवाड़ा डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा द्वारा दी गई डिग्री में आया था। इस पर प्रदेश सरकार ने विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) से शैक्षिक सत्र 2004-05 में बांटी गई बीएड की डिग्री की जांच कराने का निर्देश दिया था।
एसआईटी ने इस पूरे मामले की जांच की। जिसमें सीतापुर के 10 शिक्षक सामने आए थे। इस पर शासन ने बीएसए को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। बीएसए ने इन सभी शिक्षकों को तत्काल सेवा से बर्खास्त कर दिया। इनकी जिले में प्रथम नियुक्ति 2010 से 2015 के बीच प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर हुई थी।
इसमें एक शिक्षिका तो प्रमोशन पाकर प्रधानाध्यापक भी बन गई थी। यह सभी शिक्षक लखीमपुर खीरी, आगरा, लखनऊ व हरियाणा प्रदेश के है। साथ ही बीएसए ने वित्त एवं लेखाधिकारी को प्रथम नियुक्ति से अब तक दिए गए वेतन व भत्ते की रिकवरी के आदेश दिए है। तैनाती वाले ब्लॉक के खंड शिक्षाधिकारी को एफआईआर दर्ज कराने को कहा है। अब प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग के सभी शिक्षकों के अभिलेखों की जांच करने के निर्देश दिए है तो इसकी जद में करीब 15 हजार शिक्षक आएंगे। जिनके अभिलेख गहनता से जांचे जाएंगे।
डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से फर्जी करार दिए गए सत्यवीर सिंह प्राथमिक विद्यालय बगस्ती ब्लॉक रामपुर मथुरा, कविताराज उच्च प्राथमिक विद्यालय तेजवापुर ब्लॉक बेहटा, प्रमिला सिंह प्रधानाध्यापिका प्राथमिक विद्यालय निजामाबाद ब्लॉक परसेंडी, धर्मेद्र सिंह उच्च प्राथमिक विद्यालय दहेली ब्लॉक बेहटा, चंद प्रताप सिंह उच्च प्राथमिक विद्यालय मंसूरपुर द्वितीय ब्लॉक परसेंडी, भावना यादव प्राथमिक विद्यालय लहुरीवान सिधौली, वीरेंद्र प्रताप मिश्रा प्राथमिक विद्यालय टिकौली ब्लॉक सिधौली, महेंद्र प्रताप सिंह प्राथमिक विद्यालय सरैंया ब्लॉक परसेंडी, धर्मेद्र कुमार प्राथमिक विद्यालय गुजरापुर ब्लॉक मछरेहटा, शीलेंद्र कुमार प्राथमिक विद्यालय उमरी गनेशपुर नवीन ब्लॉक रामपुर मथुरा को बर्खास्त किया जा चुका है।
इसके अलावा एसआईटी की जांच में बिसवां विकासखंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय भुईयाकलां में तैनात सहायक अध्यापिका ओमा देवी के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के अंकपत्र व प्रमाणपत्र राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान नोयडा से फर्जी मिले थे। जिला स्तर पर बनी कमेटी की अपर जिलाधिकारी की जांच में प्रदीप कुमार सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय शुक्लनपुरवा रेउसा विकासखंड के कागजात फर्जी मिले है।
इसी प्रकार एसटीएफ को मिश्रिख विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय लोधौरा द्वितीय में तैनात आदित्य कुमार के अभिलेख फर्जी होने की शिकायत मिली थी। इस शिकायत के आधार पर इनके बीए/बीएड के अभिलेख लखनऊ विश्वविद्यालय से जांच करवाए गए, जिसमें यह फर्जी मिले है। बेहटा विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय दारापुर में तैनात आकाशदीप व पुष्पेंद्र सिंह सहायक अध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय हजरतपुर बेहटा को नौकरी से निकाला जा चुका है।
बीएसए अजीत कुमार का कहना है कि विभाग में फर्जी शिक्षकों को लेकर कई स्तर पर जांचे चल रही हैं। अगर सभी शिक्षकों की जांच का निर्देश मिलता है तो उसकी भी गहनता से जांच कराइ जाएगी।