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फर्जी शिक्षक मामला : आठ साल की भर्ती में 28 शिक्षक मिले फर्जी, बर्खास्त

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सीतापुर। बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक की नौकरी पाने के लिए युवाओं ने फर्जी अभिलेख ही तैयार करवा लिए। आठ साल में हुई शिक्षक भर्ती की जब जांच करवाई गईं तो इसमें 28 शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिले। इन शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है। इस समय करीब एक हजार शिक्षकों के अभिलेखों की जांच चल रही है। इसमें भी इस तरह के फर्जी शिक्षक मिलने की आशंका जताई जा रही है।
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फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी हथियाने के मामले में सामने आने के बाद शासन ने 2010 से 2018 तक हुई शिक्षक भर्ती की जांच कराने के निर्देश दिए गए थे। इस दौरान करीब पांच हजार शिक्षकों की जांच करवाईं गई थी। इन शिक्षकों के अभिलेख विश्वविद्यालय व बोर्ड से सत्यापित कराए गए थे। इस सत्यापन में किसी के बीएड की डिग्री तो किसी के हाईस्कूल, इंटरमीडिएट व स्नातक की डिग्री फर्जी मिली थी। यह लखनऊ विश्वविद्यालय, आगरा विश्वविद्यालय, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय व संपूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी सहित अन्य विश्वविद्यालयों से हासिल की थी। इस पर इन्हें बर्खास्त करवाकर एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी है। इस समय करीब एक हजार शिक्षकों की जांच चल रही है।
आईटीआर से पकड़ा गया था शिक्षक
आजमगढ़ निवासी एक शिक्षक ने तो दूसरे साथी के अभिलेख लगाकर नौकरी हासिल कर ली। करीब दो साल तक नौकरी करता रहा। जब आईटीआर दाखिला हुआ तो पैन नंबर मिसमैच हो गया। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मामला पकड़ में आने पर अभिलेखों की जांच हुई तो शिक्षक फर्जी निकला। इसके अलावा अन्य शिक्षक के सत्यापन में अभिलेख फर्जी मिले थे।
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एसटीएफ व जिला प्रशासन की जांच सक्रिय
एसटीएफ में भी कई शिक्षकों की शिकायत हुई है। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि फर्जी अभिलेख तैयार करवाकर नौकरी हासिल कर ली गई है। वहीं, जिला प्रशासन के पास भी इस तरह की कई शिकायतें आ चुकी हैं। इससे पहले भी एसटीएफ पांच शिक्षकों को पकड़ चुकी है। अब इनकी जांच आगे बढ़ रही है तो और भी कई शिक्षक इसमें आ सकते है।
चल रही है जांच
शिक्षकों के अभिलेख सत्यापित करवाए जाते हैं। इसमें अब तक 28 शिक्षकों को फर्जी अभिलेख मिलने पर बर्खास्त किया जा चुका है। इस समय भी शिक्षकों की जांच चल रही है। विश्वविद्यालय से सत्यापन आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए
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