सीतापुर। जिले के आठ प्रगतिशील किसानों की मेहनत रंग ला रही है। वह आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। साथ ही मिट्टी की सेहत सुधार रहे हैं। गांजर में अग्निहोत्र भस्म के उपयोग से कम लागत में अधिक उत्पादन हो रहा है। इससे जिले के तकरीबन दो हजार किसान लाभान्वित हुए हैं। इसमें महिला किसान भी शामिल हैं। इन किसानों का केवीके कटिया के अध्यक्ष डाॅ. दयाशंकर श्रीवास्तव तकनीकी मार्गदर्शन कर रहे हैं।
रेउसा ब्लॉक के सिकौहा गांव निवासी प्रगतिशील किसान श्वतांक त्रिपाठी अग्निहोत्र भस्म को अपने खेतों में उपयोग करने के साथ गांजर क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। तमाम किसान अग्निहोत्र भस्म से खेतों में पलेवा के संग बीज शोधन का भी कार्य कर रहे हैं। इससे फसल पैदा करने में लागत बहुत कम आती है, जबकि उत्पादन अधिक होता है। श्वेतांक पारंपरिक मूल्य संवर्धित पौध प्रजातियों (दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, सब्जी, चारा व औषधीय व मसाला) के संरक्षण व जैविक खेती की दिशा में अभिनव कार्य कर रहे हैं।
प्राकृतिक विधि से की जा रही औषधीय खेती
बिसवां ब्लॉक के ग्राम कमुआ निवासी प्रगतिशील किसान अशोक कुमार गुप्ता रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाते हुए औषधीय एवं संगधीय पौधों की खेती समूह बनाकर करते हैं। वह 10 महिलाओं को भी इसकी खेती करा रहे हैं। इससे बाजार से किसी भी प्रकार की निर्भरता को खत्म करते हुए पर्यावरण प्रबंधन व पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में अभिनव कार्य कर रहे हैं। इनकी खेती को देखने अर्जेंटीना के कृषि मंत्री भी आ चुके हैं। मिश्रिख ब्लॉक की ग्राम पंचायत दशरथपुर निवासी कमलेश सिंह 20 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती के क्षेत्र में समाज में जन जागरूकता पैदा कर रहे हैं। चार प्रांतों में जैविक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं। देसी बीजों व देसी नस्लों के संरक्षण व संवर्धन पर काम कर रहे हैं। आठ साल से प्राकृतिक खेती अभियान से जुड़कर लोगों को स्वावलंबी बनाने में जुटे हैं।
नौकरी छोड़कर कर रहे गन्ने ही सह-फसली
बिसवां ब्लॉक के रहने वाले प्रगतिशील किसान हिमांशु नाथ सिंह पिता की खेती से प्रेरित होकर नौकरी छोड़ बीते 10 वर्षों से गन्ने की सह- फसली खेती कर रहे हैं। सूक्ष्म सिंचाई पद्धति को अपनाते हुए गन्ने के साथ केला, सब्जी, दलहन, तिलहन एवं औषधीय पौधों की खेती करते हैं। उन्होंने एक हेक्टेयर से अधिकतम 2470 क्विंटल गन्ना प्राप्त कर चुके हैं। बेहतर गन्ना उत्पादन के लिए उन्हे प्रदेश स्तर पर सम्मान मिल चुका है। हरगांव ब्लॉक के ग्राम पिछौरा निवासी नवीन मोहन राजवंशी कोविड काल में दुबई की नौकरी छोड़ गांव में किराये की जमीन लेकर स्ट्राबेरी, जुकनी, खरबूजा, तरबूज और सब्जियों की खेती वैज्ञानिक ढंग से करते हैं। इससे तकरीबन 150 किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
371 किसानों को बनाया उद्यमी
प्रगतिशील किसान विकास सिंह तोमर खैराबाद ब्लॉक के ग्राम सरैंया सानी के रहने वाले हैं। वह आधुनिक खेती से किसानों की आर्थिक सेहत को सुधार रहे हैं। कृषि परास्नातक विकास सिंह ने वर्ष 2004 से 2009 तक विभिन्न मल्टीनेशनल कंपनियों में उच्च पद पर नौकरी की। इसके उनमें अपनी जन्मभूमि के किसानों के साथ काम करने की ललक हुई। 2009 से शुरू हुआ कारवां लगातार जारी है। विकास अबत तक 371 किसानों को उद्यमी बना चुके हैं। वह एफपीओ बनाकर 1150 किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखा रहे हैं। वह अनाज बीज उत्पादन, फूलों की खेती, मशरूम उत्पादन, फल प्रसंस्करण, मोटे अनाजों के मूल्य संवर्धित उत्पाद निर्माण के माध्यम से कृषक उत्पादक संगठन को सशक्त बनाने का कार्य कर रहे हैं।
वैज्ञानिक विधि से कर रहे उद्यानिकी फसलों का उत्पादन
एलिया ब्लॉक के ग्राम इमलिया सुल्तानपुर निवासी प्रगतिशील किसान रोहित सिंह इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कृषि में 10 वर्षों से कार्य कर रहे हैं। ड्रैगन फ्रूट, पपीता, केला व अन्य उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक विधि से खेती करते हैं। उन्हें राज्य और केंद्र स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। प्रगतिशील किसान विनोद निषाद बेहटा ब्लॉक के ग्राम जालिमपुर मरोड़ के रहने वाले हैं। वह केला, पपीता, सब्जी, दलहन, तिलहन की खेती किराए पर खेत लेकर करते हुए 25 लाख रुपये वार्षिक लाभ कमा रहे हैं। 150 किसान इससे सीधे जुड़कर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।