सीतापुर। आसमान छूती महंगाई के बीच दवाओं ने भी आम आदमी को झटका दिया है। आम बीमारियों की दवाओं के 15 से 20 फीसदी तक दाम बढ़ गए है। इससे लोगों को अब दवा खरीदने के लिए अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। 10 रुपये में एक पत्ता मिलने वाली पैरासिटामॉल की गोली 12 रुपये तक पहुंच गई है।
इसी तरह अन्य दवाओं की कीमतों में इजाफा होने से आम आदमी परेशान है। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी, माल ढुलाई सहित अन्य कारणों से कीमतों में वृद्धि हुई है।
महंगाई लगातार बढ़ रही है। खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से आम आदमी कराह रहा है। अब दवाओं के रेट बढ़ने से उसकी कमर ही टूट गई है। करीब एक माह पहले जिन दवाओं को 100 रुपये में खरीदा जा सकता था। अब यही दवाएं 120-130 रुपये खर्च करके मिल रही हैं। मेडिकल स्टोर चलाने वाले छोटू ने बताया कि दवाओं की कीमतों में 15 से 20 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।
अधिकतर दवाओं के रेट बढ़ गए है। इस समय कुछ माल पुराने एमआरपी पर हैं जो पुराने रेट पर बिक रहे हैं। नया माल बढ़े हुए रेट पर आ रहा है। कई दवाओं के एमआरपी तो नहीं बढ़ाई गई है, लेकिन मुनाफा कम हो गया है।
इस समय अगर दवाओं की बात की जाए तो पेट दर्द, बुखार, दिल की बीमारी, त्वचा रोग, डिहाइड्रेशन में प्रयोग होने वाली दवाओं के रेट बढ़ गए है। इस बढ़ोतरी के कारण आम आदमी को दवा खरीदने के लिए अतिरिक्त बोझ वहन करना पड़ रहा है। दवा व्यापारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी अन्य पदार्थों में महंगाई, जीएसटी, माल ढुलाई अधिक होने के कारण हुई है।
10 गोलियों की कीमत
दवा पहले अब
पैरासिटामॉल 90 110
एजीथोमाइसिन 22 24
एंटीबायोटिक टेबलेट 10 13
पेन किलर 7 10
गैस की गोली 12 14
200 रुपये का पड़ा अतिरिक्त भार
राशी पांडेय ने बताया कि बुखार व पेट दर्द हो रहा था। डॉक्टर ने डिहाइड्रेशन होना बताया था। इस पर एक सप्ताह पहले 200 रुपये की दवा खरीदी थी। अब दोबारा दिक्कत होने पर वही पर्चा लेकर मेडिकल स्टोर गए तो 230 रुपये की दवा मिली है। मोहिनी ने बताया कि पिता की बीमारी पर हर माह करीब एक हजार रुपये का खर्च आता है।
वह लंबे समय से दिल, सांस सहित अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं। अभी तीन दिन पहले दवा खरीदने गए तो यही दवा 1250 रुपये में मिली। करीब 250 रुपये का अतिरिक्त भार वहन करना पड़ा।
दवा, गैस व आटा हुआ महंगा
गृहिणी रंजना ने बताया कि सरकार को महंगाई कम करने का प्रयास करने चाहिए। पहले रसोई गैस के दाम बढ़े तो परेशान हुई। उसके बाद आटा, चावल व दालों के दामों में काफी इजाफा हो गया। इससे रसोईघर का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया। हम लोग रोजाना सरकार से महंगाई कम होने की उम्मीद कर रहे हैं।
अब दवाओं के रेट में भी इजाफा हो गया है। घर परिवार चलाने से लेकर सेहत दुुरुस्त रखने के लिए अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है। शिवानी का कहना है कि सरकार को कम से कम दवाओं पर तो राहत देनी ही चाहिए।
दवाओं की बढ़ी बिक्री
दवा के कारोबार अनुराग किश्र बताते हैं कि इस समय संक्रामक रोग फैल रहे है। बुखार का प्रकोप चल रहा है। मलेरिया, डेंगू के भी मरीज सामने आ रहे हैं। इसके कारण पैरासिटामॉल, विटामिन सहित अन्य दवाओं की बिक्री में तेजी आई है। जब तक मौसम ठंडा नहीं होगा तक तक बिक्री इसी तरह चलती रहेगी।
एक मेडिकल स्टोर वाला करीब एक माह पहले पांच हजार की रोजाना दवा बेचता था। अब वहीं व्यापारी करीब सात से आठ हजार की दवा बेच रहा है। अधिकतर उन्हीं दवाओं के रेट बढ़े है जो इस समय प्रयोग की जा रही हैं।