सकरन। अप्रैल माह में संचारी रोग अभियान समाप्त हो गया, लेकिन गांवों में साफ-सफाई और एंटी लार्वा छिड़काव के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में कई गांवों में गंदगी, जलभराव और बजबजाती नालियां मिलीं। ग्रामीणों का आरोप है कि महीनों से सफाईकर्मी नहीं आए और न ही स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची।
एक से 30 अप्रैल तक चले अभियान में गांवों की सफाई, जलभराव दूर कराने और दवा छिड़काव की जिम्मेदारी ब्लॉक प्रशासन को दी गई थी। वहीं स्वास्थ्य विभाग को लोगों को संचारी रोगों के प्रति जागरूक करना था, लेकिन कई गांवों में यह अभियान कागजों तक सीमित रहा।
केस-1 : रास्तों पर कीचड़ और गंदगी
ग्राम पंचायत बोहरा, सकरन और ताजपुर सलोली में रास्तों पर कीचड़ और नालियों में गंदगी मिली। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लंबे समय से सफाई नहीं हुई और मच्छरों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव भी नहीं कराया गया।
केस-2 : गांव में नहीं हुआ छिड़काव
महाराजनगर ग्राम पंचायत के मजरा गजनीपुर व बड़हरपुरवा में कूड़े के ढेर लगे मिले। ग्रामीणों का कहना है कि सफाईकर्मी नियमित नहीं आते, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है।
केस-3 : सफाईकर्मी नहीं पहुंचते
बसहिया कोठार और उसके मजरों में जलभराव और गंदगी की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में न सफाई होती है और न ही दवा का छिड़काव कराया गया।
खंड विकास अधिकारी श्रीश कुमार गुप्ता ने कहा कि रोस्टर के अनुसार सफाई कराई जा रही है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी। वहीं सीएचसी अधीक्षक डॉ. आनंद मित्रा ने बताया कि अधिकांश ग्राम पंचायतों को कीटनाशक दवाएं भेजी जा चुकी हैं और जल्द छिड़काव कराया जाएगा।