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जिला अस्पताल में मिलेगी डायलिसिस सेवा : मंत्री जय प्रताप सिंह

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जिला अस्पताल में चिल्ड्रेन वार्ड में महिला से जानकारी लेते चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री जय - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि जिला अस्पताल को डायलिसिस सेवा के लिए चुना गया है। जल्द ही मरीजों को डायलिसिस सेवा मिलेगी। इससे गंभीर मरीजों को लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा। वह जिला अस्पताल में ही इलाज करा सकेंगे।
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उन्होंने कहा कि सीएचसी व पीएचसी पर ड्यूटी के दौरान गैरहाजिर रहने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ से निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर चिकित्सकों का ब्यौरा तलब किया। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता सुरक्षित प्रसव, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सुविधा मरीजों को मिले, इसके लिए बराबर प्रयास किए जा रहे हैं। सीतापुर में अगर चिकित्सक समय से ड्यूटी नहीं कर रहे हैं, वह रात्रि में सीएचसी में ठहराव नहीं करते हैं तो जांच कराई जाए। लापरवाही पर कार्रवाई होगी।
सीएमओ डॉ. मधु गैरोला से ऐसे चिकित्सकों की सूची तलब की। जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर खैराबाद में ट्रामा सेंटर होने पर कहा कि ट्रामा सेंटर 100-150 किलोमीटर के बीच होना चाहिए। वह भी हाईवे के किनारे हो। जिले में हाईवे से दूर ट्रामा सेंटर का भवन बना है। वहां पर चिकित्सकों के ठहराव के लिए आवास भी नहीं बने हैं। इसकी सीएमओ से जानकारी ली जाएगी।
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जिला अस्पताल पहुंचकर देखी सुविधाएं
मंत्री जय प्रताप सिंह ने सीएचसी कसमंडा का निरीक्षण किया। उसके बाद वह सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। वहां पर अल्ट्रासाउंड कक्ष, एक्सरे कक्ष, सिटी स्कैन व एनआरसी सेंटर को देखा। एनआरसी सेंटर में कुपोषित बच्चों से बातचीत की। उनको नियमित भोजन मिलने बात पूछी। जिसमें बच्चों ने खाना व दवाई भरपूर मिलने की बात कही। इसके बाद मंत्री ने सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल व जिला महिला अस्पताल सीएमएस डॉ. सुषमा कर्णवाल से स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी हासिल की।
अल्ट्रासाउंड डॉक्टरों की कमी
जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में एक ही चिकित्सक के सहारे अल्ट्रासाउंड सुविधा चल रही है। जब इस समस्या पर मंत्री से सवाल पूछा गया तो बोले, यह समस्या अकेले सीतापुर की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की है। प्रदेश में करीब 700 पद हैं। जिसमें महज 165-170 के बीच ही चिकित्सक तैनात है। इस सेवा में बहुत ही कम चिकित्सक आ रहे हैं। अब नई भर्ती में कुछ चिकित्सकों ने हौसला दिखाया है। उम्मीद है इन चिकित्सकों के सहारे यह कमी पूरी की जाएगी।
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