किसी को हेड इंजरी हो गई हो या फिर डायलिसिस होनी हो। ऐसे मामलों में अभी तक जिला अस्पताल हाथ खड़े कर देता था। डॉक्टर चाहकर भी इलाज नहीं कर पाते थे। नतीजतन मरीजों को लखनऊ मेडिकल कॉलेज व ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
जल्द ही जिला अस्पताल में ही दोनों सेवाएं मिलने लगेंगी। ऐसे में अब मरीजों को डायलिसिस व सिर में गंभीर चोट के इलाज के लिए लखनऊ तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
213 बेड वाले जिला अस्पताल पर जिले के 45 लाख लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है। बावजूद इसके यहां संसाधनों का अभाव है। बात अगर हेड इंजरी का आ जाए, तो डॉक्टर सीटी स्कैन की सुविधा न होने का हवाला देते हुए इलाज के लिए हाथ खड़े कर देते हैं।
इसी तरह से डायलसिस वाले मरीजों के साथ होता है। अब शासन ने दोनों सेवाएं जिला अस्पताल में उपलब्ध कराने को मंजूरी दे दी है। मंजूरी मिलते ही जिला अस्पताल परिसर में ही जमीन चिह्नित की गई है।
इस पर 40 लाख रुपये खर्च कर डायलिसिस यूनिट का निर्माण होगा। अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन लगाने के लिए जिला अस्पताल की आई यूनिट की इमारत खाली की गई है। इसी इमारत में सीटी स्कैन मशीन लगाई जाएगी। ऐसे में डायलिसिस व सीटी स्कैन की जरूरत वाले मरीजों को अब लखनऊ तक का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।