इस दौरान श्रद्घालुुओं ने जागरण कर राम चरित मानस व सुंदरपाठ का आयोजन किया। श्रद्घालुओं ने पुण्य लाभ के लिए दान भी किया।
एकादशी व्रत व पूजन करने से परिवार में सुख-समृद्घि व संपन्नता बढ़ती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान अथवा देव प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। रविवार को देवोत्थान एकादशी परंपरागत तरीके से मनाई।
इस दिन श्रद्घालुओं ने व्रत रखकर भगवान विष्णु की उपासना कर उन्हें गन्ना, सिंघाड़ा व गुड़ का भोग लगाया। रात में भगवान नारायण के मंत्र का जप, राम चरित मानस व सुंदरकांड का पाठ करते हुए जागरण किया। श्रद्घालुओं ने भगवान नारायण से परिवार व कृषि में संपन्नता का आशीर्वाद मांगा।