सीतापुर। मिश्रिख में पंच कोसी परिक्रमा अपने पौराणिक मान्यताओं के बाद संपन्न हो गई। अंतिम दिन गुरुवार को दधीचि कुंड पर महाआरती हुई। आतिशबाजी के साथ ही परिक्रमार्थी घरों को लौट गए। परिक्रमार्थियों के घर जाने से मिश्रिख में सन्नाटा पसर गया।
84 कोसी परिक्रमा मिश्रिख में 12 मार्च को आ गई थी। उसके बाद पंच कोसी परिक्रमा शुरू हो गई थी। पांच दिनों तक चलने वाली परिक्रमा के आखिरी दिन दधीचि कुंड में परिक्रमार्थियों ने स्नान किया। उसके बाद परिक्रमा पूरी करके साधु संतों को दान दक्षिणा दिया। कुंड पर महाआरती का आयोजन हुआ। इस आयोजन में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों ने प्रतिभाग करके पूरा माहौल भक्तिमय बना दिया।
हर तरफ आरती की गूंज सुनाई दे रही थी। हर परिक्रमार्थी हाथ जोड़े बस आरती में ही लीन था। महाआरती के बाद जय श्रीराम के नारे लगाए गए। उसके बाद परिक्रमार्थियों के स्वागत में आतिशबाजी की गई। आतिशबाजी का नजारा देखने के लिए हर कोई उत्सुक दिखाई दिया। करीब एक घंटे तक जमकर आतिशबाजी हुई। दधीचि कुंड पर हर तरफ पटाखों की ही ध्वनि सुनाई दे रही थी।
इसके बाद परिक्रमार्थी अपने घरों को रवाना हो गए। परिक्रमार्थी इस संकल्प के साथ घर रवाना हुए कि अगले बरस पूरी आस्था के साथ इस परिक्रमा में शामिल होने जरूर आऊंगा। परिक्रमा होते ही मिश्रिख में सन्नाटा पसर गया। एक सप्ताह से यहां के बाग बगीचों में साधु संत टिके हुए थे। महाआरती के दौरान विधायक रामकृष्ण भार्गव, उप जिलाधिकारी मिश्रित गौरव रंजन, क्षेत्राधिकारी सुशील कुमार यादव, मेला प्रभारी राजेश कुमार, ईओ रुद्र प्रताप सिंह, कस्बा इंचार्ज ऋषभ यादव, तीर्थ पुरोहित हितकारी संस्थान के अध्यक्ष राजेश मिश्रा, महामंत्री सुनील मिश्रा सहित आदि मौजूद रहे।
यह है मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पंच कोसी परिक्रमा के समापन से पहले आतिशबाजी होती है। इस आतिशबाजी के बारे में महत्व है कि महर्षि दधीचि की अस्थियों के जरिये राक्षसों का वध किया गया था। जब परिक्रमार्थी परिक्रमा पूरी करते हैं, उसके बाद उनके घर वापस जाने से पहले उनके स्वागत में आतिशबाजी होती है। राक्षसों पर जीत की खुशी में आतिशबाजी की जाती है।