सीतापुर। नवरात्र की सप्तमी पर घरों व मंदिरों में मां कालरात्रि की उपासना हुई। रात को भक्तों ने काली मंदिरों में पहुंचकर मां के चरणों में माथा टेका। शहर के श्मशान घाट स्थित काली मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त उमड़े। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भक्तों ने मां की आराधना की।
मां कालरात्रि को भैरवी, भद्रकाली, चामुंडा, चंडी, धुमोरना, भैरवी आदि नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है कि कालरत्रि की आराधना करने से शत्रुओं के साथ ही नकारात्मक शक्तियों का नास होता है और गृह दोषों से मुक्ति मिलती है। मां कालरात्रि तांत्रिक विधानों के लिए पूजी जाती हैं। ऐसे में मां के भक्त मन्नतों को लेकर सुबह से मां की आराधना की तैयारी करने लगे।
तैयारी पूरे होने के बाद घरों व मंदिरों में पूजन-अर्चन का दौर शुरू हो गया। मां की विशेष पूजा के लिए रात में भक्त श्मशान घाट के मंदिर में उमड़े। कपूर और लौंग की आरती करके मां को जटा नारियल की बलि अर्पित की। कोरोना के चलते श्रद्धालुओं ने प्रसाद का वितरण नहीं किया। कुछ ने मन्नतें पूरी करने के लिए मंदिर परिसर में जाप भी किया।
शहर के दुर्गा मंदिर, जेल रोड स्थित गायत्री मंदिर, घूरामऊ स्थित मंदिर, पंजाबी धर्मशाला मंदिर, शीतला देवी मंदिर, मां ललिता देवा नैमिषारण्य, संकटा मां मंदिर महमूदाबाद, सोनसरी मंदिर रेउसा आदि मंदिरों में भी भक्तों ने शीश नवाया।
100 रुपये तक बिका नारियल
मां कालरात्रि के पूजन के लिए जटा नारियल की जमकर खरीदारी हुई। ऐसे में ठेला पर नारियल रखकर बेच रहे लोगों की बल्ले-बल्ले रही। बड़ा नारियल 100 रुपये प्रति पीस तक बिक गया। 50 रुपये के नीचे जटा नारियल का गोला मिला ही नहीं। शहर में दूसरे फाटक से लेकर घंटाघर तक सड़क के किनारे खड़े होकर कई लोगों ने जटा नारियल की बिक्री की।
भक्त नारियल खरीदकर गोपाल घाट मंदिर गए और मां को अर्पित किया। शाम करीब सात बजे मां की भव्य आरती उतारी गई। आरती की छटा देखते ही बनी। मंदिर परिसर काली मां के जयकारों से गूंज उठा। कोरोना के चलते इस बार मां के दरबार में मेला नहीं लगा। ऐसे में बच्चे नहीं दिखई दिए। भजन कीर्तन का आयोजन भी सीमित रहा।
मां ललिता देवी मंदिर कम आए श्रद्धालु
35 घंटे के लॉकाडाउन के बाद विश्वविख्यात मां ललिता देवी का दरबार सोमवार को खुल गया, लेकिन कोरोना की दहशत के चलते श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम रही। दो-दो चार-चार की ही टोली में भक्त मां दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों ने बाकायदा भक्तों के हाथ सैनिटाइज करके प्रवेश की अनुमति दी।
श्रद्धालुओं की संख्या कम देख धार्मिक पर्यटन से जुड़े लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखीं। तीर्थ पुरोहित, पुजारी, प्रसाद विक्रेता व माली उदास दिखे। प्रसाद विक्रेता चन्द्रमोहन ने कहा कि पिछले वर्ष में चैत्र के नवरात्र कोरोना की भेंट चढ़ गए थे। इस बार भी कोरोना की काली छाया ने पीछा नहीं छोड़ा है। कमाई का संकट खड़ा हो गया है।