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Sitapur News: पीढ़ियों की परंपरा निभाने नेपाल से आ रहे श्रद्धालु

Wed, 30 Sep 2026 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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नैमिषारण्य। पितृ पक्ष में देश-विदेश के श्रद्धालु अपने पितरों की तृप्ति व मुक्ति के लिए नैमिषारण्य पहुंच रहे हैं। नेपाल से भारी संख्या में श्रद्धालु अपनी पीढि़यों की परंपरा निभाने के लिए यहां आकर तर्पण व पिंडदान कर रहे हैं। देश के तीन गया में नैमिषारण्य की नाभि गया भी शामिल है। पितरों की तृप्ति के लिए नैमिष विशिष्ट भूमि के रूप में जाना जाता है।
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ऐसे में पितृपक्ष शुरू होने के बाद देश-विदेश से पितरों के कार्य करने के लिए श्रद्धालुओं का नैमिष तीर्थ में आने का क्रम शुरू हो गया है। यहां श्रद्धालुगण आचार्यों के माध्यम से वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य अपने पितरों की तृप्ति व मुक्ति के लिए पिंडदान व तर्पण करते हैं। पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों की अक्षय तृप्ति और शांति के लिए नैमिषारण्य में विधि विधान से तर्पण व पिंडदान कर रहे हैं। उन्होंने पिंडदान करने को अपनी पीढियों की परंपरा बताते हुए कहा कि यहां तर्पण व पिंडदान करने से पितरों को तृप्ति व मुक्ति मिलती है।
नैमिष में पिंडदान के महत्व का वर्णन
अपने बड़े भाई के साथ माता पिता का पिंडदान करने आया हूं। नेपाल के धार्मिक ग्रंथों में वर्णन है कि नैमिषारण्य में अपने पितरों का पिंडदान व तर्पण करने से उनको मुक्ति मिलती है। हमारे परिवार में कई पीढ़ियों से अपने पितरों का पिंड श्राद्ध इसी तीर्थ में आकर किया जा रहा है।
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गणेश साबजी, कंचनपुर नेपाल


निभा रहे पीढि़यों की परंपरा का जिम्मा
पितृपक्ष में प्रतिवर्ष अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने आता हूं। इससे पूर्व हमारे पिता अपने पिता का पिंडदान करने के लिए आते थे। पिता की मृत्यु के बाद पीढि़यों से चली आ रही इस परंपरा का जिम्मा हम निभा रहे हैं। अपने पिता समेत सभी पूर्वजों का तर्पण करने के लिए आया हूं l
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- राम बहादुर, महेंद्रनगर नेपाल
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