आपातकाल के दौरान जेल में बंद रहे कैदियों को सरकार ने सम्मान देते हुए लोकतन्त्र सेनानियों का दर्जा दिया है। इनको प्रतिमाह दस हजार पेंशन, बसों में फ्री यात्रा की सुविधाओं के साथ ही अस्पतालों में निशुल्क इलाज की सौगात दी गई।
यह सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अफसरों को सौंपी गई लेकिन जिले के अनेक आपातकालीन बंदी अब भी वर्षों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे है।
गुरुवार को चार वृद्ध आपातकाल के बंदी पेंशन की मांग को लेकर अफसरों से मिले। महोली, पिसावां व रामकोट थाना क्षेत्रों के फकीरे, रामलोटन, बनवारीलाल व जयलाल ने बताया कि वर्ष 1976-77 के बीच में लागू आपातकाल के दौरान मीसा व डीआरआई जेल में बंद थे।
लोकतन्त्र सेनानी का दर्जा मिलने के लिए 2013 में आवेदन किया था। अभी तक पत्रावली जांच ही चल रही है, जिसके कारण लोकतंत्र सेनानी का दर्जा नहीं मिल रहा है।