फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेटियों ने संभाली थाने और कोतवाली की कमान

विज्ञापन
सीतापुर के लहरपुर में कोतवाली प्रभारी बनी प्रज्ञा मिश्रा ने बिना मास्क लगाए दोपहिया वाहनों चाला - फोटो : SITAPUR
विज्ञापन
सीतापुर। जिले में मिशन शक्ति के तहत चलाए जा रहे अभियान की कड़ी में एसपी आरपी सिंह ने बेटियों का मनोबल बढ़ाने की मंशा से शनिवार को एक अनूठी पहल की है। एसपी के आदेश पर शहर कोतवाली समेत अन्य कोतवाली, थानों में छात्राओं को तीन घंटे के लिए कोतवाल और थानेदार बनाया गया। तीन घंटे के लिए थानेदार बनने वाली छात्राओं ने कई मामलों की सुनवाई की। खामियां और अनुशासनहीनता सामने आने पर फटकार लगाई। चेकिंग अभियान का हिस्सा बनकर नियम-कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई का चाबुक चलाया। कोतवाली, थानों में बैठकर फरियादियों की समस्याएं सुनीं और पुलिस के काम करने के तौर तरीकों से भी वाकिफ हुईं।
विज्ञापन

जिले में मिशन शक्ति के जरिए बेटियों को शक्तिशाली बनाने की कवायद चल रही है। इन कवायदों के बीच शनिवार को उन्हें ‘बाहुबली’ होने का एहसास कराया गया। शनिवार को तीन घंटे के लिए जिले की पुलिसिंग बेटियों के हाथ में रहीं। इस दौरान बेटियों ने न सिर्फ फरियाद लेकर आए पीड़ितों को त्वरित इंसाफ दिलाने का काम किया, बल्कि चेकिंग के जरिए चालान भी काटे। थानों की हवालात में बंद अपराधियों के सवाल-जवाब भी किए और मातहतों को कड़ाई से निर्देशों का पालन करने का संदेश भी दिया। थानों की कमान संभालने वाले बेटियों ने यह भी साबित कर दिया कि वह कागजी खानापूरी की जानकारी भी रखती हैं। थानों की इंचार्जी के वक्त बेटियों ने थानों के रजिस्टर भी चेक किए।
शहर के सिविल लाइंस निवासी अंजलि तीन घंटे के लिए शहर कोतवाल बनीं। इंस्पेक्टर टीपी सिंह ने अंजलि के लिए कुर्सी छोड़ दी। अंजलि ने इंस्पेक्टर का कैप लगाकर कुर्सी पर विराजमान हुई और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। लहरपुर इंस्पेक्टर ओपी राय ने प्रज्ञा मिश्रा को कोतवाली में जिम्मेदारी दी। जैसे ही प्रज्ञा ने चार्ज संभाला, वैसे सबसे पहले लोगों का परिचय लिया। मछरेहटा थाने की कमान दीक्षा शुक्ला, मिश्रिख की प्राची, पिसावां की पल्लवी सिंह, महोली में सुकृति मिश्रा, महमूदाबाद में भूमिका सिंह, संदना में दीप्ति गुप्ता, रामपुर कलां में नारायणी, बिसवां में जसप्रीत कौर, सदरपुर में शगुता परवीन ने जिम्मेदारी संभाली।
विज्ञापन

बेटियों ने पुलिस के साथ कदम मिलाकर शिकायतें सुनने के अलावा वाहन चेकिंग, गश्त सहित अन्य पुलिस कार्रवाईयों में प्रतिभाग किया। सिधौली कोतवाली की कमान संभालने वाली महिमा शर्मा की पुलिसिंग का अंदाज ही निराला था। महिला ने सीयूजी पर आने वाली सूचना को भी अटेंड किया। एक फोन आने पर महिमा बोली, मैं सिधौली इंस्पेक्टर महिमा शर्मा बोल रही हूं। आत्मविश्वास से लबरेज महिमा ने शिकायतें भी सुनीं। सकरन थाने की कमान सूर्य प्रताप इंटर कॉलेज गड़ौसा की 11वीं की छात्रा जसप्रीत कौर को दी गई। तीन घंटे के लिए एसओ सकरन बनी जसप्रीत ने महिला हेल्प डेस्क, कार्यालय कंप्यूटर कक्ष और अन्य जानकारियां हासिल की। शनिवार का इन दिन पुलिस महकमे और इन बेटियों के लिए यादगार हो गया।
क्राइम ग्राफ भी गिरा
भले ही तीन घंटे के लिए सही, पर इस अल्प समय में बेटियों धमक से शायद अपराधी भी सहमे रहे। शनिवार को एक दिन के क्राइम ग्राफ पर गौर करें तो जिले में कोई भी बड़ी आपराधिक वारदात सामने नहीं आई। दिन में लूट, चोरी जैसे बड़े अपराध सामने नहीं आए। बेटियों ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
अब आईपीएस बनने का है सपना
महोली कोतवाली की तीन घंटे कमान संभालने वाली सुकृति मिश्रा का कहना है कि उन्हें कोतवाल बनकर कानून व्यवस्था संभालने पर गर्व है। उन्होंने कहा कि इस दौरान प्रयास रहा कि कोई भी फरियादी निराश होकर वापस न जाए। उसे न्याय मिले। इससे उनके मन में भविष्य में आईपीएस बनकर देश की सेवा करने की भावना पैदा हुई है। पुलिस की गाड़ी से कस्बा और क्षेत्र का निरीक्षण करना उनके लिए सबसे बड़ी खुशी का पल रहा है। कुछ यही शब्द उन सभी छात्राओं के थे, जिन्होंने तीन घंटे की थानेदारी संभालकर कुछ नया सीखने का अनुभव हासिल किया।
बेटियों का आत्मबल बढ़ाने की कोशिश
बेटियों का आत्मबल बढ़ाने के लिए ये पहल की गई है। ऐसी पहल से समाज में एक अच्छा संदेश जाता है। पुलिस और पब्लिक के बीच बेहतर तालमेल बनाना जरूरी है। आज के समय में इसकी बहुत जरूरत है। जिन बेटियों को कोतवाल, थानेदार बनाकर कुर्सी पर तीन घंटे के लिए बिठाया गया, वे काफी खुश हैं। इन तीन घंटों में बेटियों ने जो कुछ सीखा, समझा, वह उनके लिए यादगार रहेगा। ये शासन का आदेश था। उसी के तहत किया गया है।
विज्ञापन

- आरपी सिंह, एसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें