सीतापुर। दि सेकसरिया बिसवां शुगर फैक्टरी लिमिटेड के पिछले तीन पेराई सत्रों के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। तीन सत्रों में मिल में गन्ने की पेराई में 33. 05 लाख क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट न केवल मिल प्रबंधन के लिए, बल्कि क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए भी गहरी चिंता का विषय है।
बिसवां स्थित यह चीनी मिल डेढ़ दशक पूर्व राष्ट्रीय रैंकिंग में टॉप पांच मिलों में शामिल थी। इसके उत्कृष्ट प्रदर्शन की नजीर दी जाती थी। पिछले तीन पेराई सत्रों में मिल में पहुंचने वाले गन्ने की मात्रा में लगातार गिरावट दर्ज हुई है। गन्ने की कम उपलब्धता चर्चा का विषय बनी है।
सूत्रों के अनुसार गन्ना किसान अन्य विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। केन डेवपलमेंट के मामले में मिल पिछड़ रही है। इस गिरावट का सीधा असर न केवल मिल के वित्तीय स्वास्थ्य पर पड़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
बिसवां की सेकसरिया चीनी मिल वर्ष 1939 में स्थापित हुई थी। इस चीनी मिल के नाम वर्ष 2018 में देश भर में सबसे अधिक समय तक गन्ना पेराई करने का रिकॉर्ड भी शामिल है। उस पेराई सत्र में करीब एक करोड़ 61 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की गई थी।
पेराई सत्र 25 अक्तूबर 2017 को शुरू हुआ था। मिल 22 जून 2018 को दोपहर 1.30 बजे बंद की गई थी। गन्ना विभाग का कैलेंडर छह माह का ही होता है, लेकिन चीनी मिल लगभग आठ माह चली थी। (संवाद)