सीतापुर। जिले में अघोषित कटौती ने किसानों को परेशान कर रखा है। इसकी सबसे बड़ी मार फसलों पर पड़ रही है। पर्याप्त बिजली न मिलने के कारण फसलें सूख रही है। एक दिन की सिंचाई वाला काम तीन से चार दिन में हो पा रहा है। इससे फसल की लागत बढ़ती है। मजदूरों को भी अधिक पैसे देने पड़ रहे है।
जिले में इस समय अघोषित बिजली कटौती का सिलसिला जारी है। गांवों व कस्बों के हालात बहुत खराब हैं। गांवों में मुश्किल से चार से पांच घंटे ही बिजली आ रही है। इतनी कम आपूर्ति मिलने से किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। हालात यह है जिस खेत की सिंचाई करने में एक दिन का समय लगता है, उस खेत के लिए किसान दो से तीन दिन तक लगातार प्रयास करते हैं, तब जाकर सिंचाई हो पाती है।
ऐसे में जितने खेत में पानी पहुंच जाता है, वह भी तेज धूप में सूख जाता है। इससे किसानों को व्यर्थ में मजदूरी देनी पड़ रही है। इससे किसानों की सिंचाई के कारण लागत बढ़ती जा रही है। यह हालात एक दो जगह के नहीं है बल्कि पिसावां, मिश्रिख, रामपुर मथुरा, बिसवां, महमूदाबाद, हरगांव, खैराबाद सहित पूरे जिले के बने हुए है। इससे किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
करीब एक हजार अतिरिक्त देने पड़े
किसान कृष्णकांत शुक्ल का कहना है कि पांच बीघा गन्ने की सिंचाई करनी थी। किराये से पाइप लाए और तीन मजदूरों को सिंचाई करने के लिए लगाया। पांच बीघा खेत एक ही दिन में हो सकता था लेकिन पहले दिन तीन घंटे बिजली आई तो कुछ सिंचाई की। उसके बाद पूरा दिन मजदूर बैठे रहे। रात को बिजली आई तो मजदूर नहीं थे। इससे पूरे खेत की तीन दिन में सिंचाई हो पाई। इससे लागत भी काफी अधिक आई। इससे करीब एक हजार रुपये अतिरिक्त देने पड़े।
कई दिनों से बनी है समस्या
किसान अमर सिंह राठौर ने बताया कि समय से बिजली नहीं मिल पाती है। इसकी वजह से ट्यूबवेल चलाना मुश्किल हो रहा है। काफी दिनों से यह समस्या बनी हुई है। शिवकुमार सिंह का कहना है कि इस समय तेज धूप हो रही है। जिसके कारण फसलों को पानी की जरूरत है। लेकिन समय से बिजली न मिल पाने के कारण फसलें सूख रही है।
जल्द सामान्य होंगे हालात
इस समय शासन स्तर से रोस्टिंग हो रही है। इसी वजह से दिक्कत आ रही है। पर्याप्त आपूर्ति मिलने पर जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे।
- नंदलाल, अधीक्षण अभियंता