अपर सत्र न्यायाधीश देवी शंकर प्रसाद श्रीवास्तव ने हत्या के एक मामले में तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर 12-12 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गिरिंद्र पाल सिंह यादव ने की।
हरगांव थाना क्षेत्र के सेमरीभान निवासी रईस की पत्नी कमरुननिशा ने 16 सितंबर 2006 को हरगांव थाने पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि 9 सितंबर 2006 को हरगांव कस्बे में नाई का काम करने वाले रईस को गांव के ही रहने वाले रघु के बेटे विश्राम, रामलखन व राम प्रकाश अपने घर बुला ले गए थे।
इसके बाद रईस की तलाश की गई, लेकिन उसका पता नहीं चला। इसके बाद 11 सितंबर 2006 को सड़क किनारे गन्ने के खेत में रईस का शव पड़ा मिला। मामले में रईस की पत्नी कमरुननिशा ने रघु के तीनों लड़कों व उसकी पत्नी सीता को नामजद किया था।
पुलिस ने चारों आरोपियों के विरुद्घ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायाधीश ने विश्राम, रामलखन व राम प्रकाश को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 12-12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जबकि कोर्ट ने सीता को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।