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शारदा नहर में गिरी कार, डूबने से युवक की मौत

Sat, 23 Sep 2017 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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सदरपुर में शनिवार को एक कार अनियंत्रित होकर शारदा नहर में जा गिरी। हादसे में कार में सवार एक युवक की डूबने से मौत हो गई। जबकि उसके पिता व भाई समेत तीन लोगों को ग्रामीणों ने बचा लिया। हादसे में तीनों बुरी तरह से जख्मी हो गए हैं। उन्हें सीएचसी सरैंया में भर्ती कराया गया है। बताते हैं कि गाड़ी चार दिन पहले ही खरीदी थी।
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ग्राम पट्टी सरैंया महीपत सिंह निवासी राजेश कुमार (45) ने चार दिन पहले ही कार खरीदी थी। शनिवार को राजेश अपने पुत्र अनुज (18), छोटू (14) व गांव के श्यामू (25) के साथ कार से बिसवां बाजार गया था। खरीदारी करने के बाद शाम को ये लोग घर लौट रहे थे। तभी सदरपुर के ग्राम अकबापुर के निकट कार अनियंत्रित होकर शारदा नहर में गिर गई।

वहीं हादसे को देखते ही उधर से गुजर रहे राहगीरों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने आननफानन नदी में छलांग लगा दी। मदद को पहुंचे ग्रामीणों ने कार सवारों को बचाने के लिए जैसे ही दरवाजा खोला। कार में सवार लोग नहर में डूबने लगे। ग्रामीणों ने करीब आधा घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को किसी तरह नहर से बाहर निकाला।
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लेकिन सीट बेल्ट समय से न खुलने से अनुज की डूबकर मौत हो गई। ग्रामीणों ने जब उसे बाहर निकाला तो अनुज की सांसें थम चुकी थीं। जबकि राजेश कुमार, छोटू व श्यामू की हालत बिगड़ चुकी थी। तीनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। ग्रामीणों ने तीनों को सरैंया सीएचसी में भर्ती कराया। वहीं खबर पाकर परिवारीजन भी अस्पताल पहुंच गए थे।

हादसा जहां पर हुआ, उस क्षेत्र के बाशिंदों की मानें तो नहर में गिरने के बावजूद कार तैर रही थी। गांव के बाशिंदों ने जैसे ही मदद के लिए कार का दरवाजा खोला, वह कार नहर में डूबने लगी। लोगों का कहना है जब तक दरवाजा बंद था, तब तक पानी कार के अंदर नहीं घुसा था, जैसे ही दरवाजा खुला, पानी कार में प्रवेश कर गया और कार डूब गई।

बताते हैं कि जिस वक्त कार नहर में गिरी, उस वक्त अनुज ने सीट बेेल्ट लगा रखी थी। गांव के लोग जब मदद को पहुंचे, तो सीट बेल्ट नहीं खोल पाए। लोगों को सीट बेल्ट खोलने में काफी वक्त लग गया, जिसकी वजह से अनुज की डूबकर मौत हो गई।

बच्चों की खुशी के लिए राजेश कुमार ने हाल ही में नई कार खरीदी थी। उसने सपने में भी नहीं सोचा था, कि जिस कार को देखकर बच्चे इतना खुश हैं वहीं कार कुछ दिनों बाद गहरे जख्म दे जाएगी। घटना के बाद राजेश घायल हो चुका था, बावजूद इसके उसे अपने जख्मों के दर्द से अधिक वह दर्द अधिक तकलीफ दे रहा था, जो उसका पुत्र उसे छोड़कर चला गया। वह बार-बार कह रहा था, हे! भगवान तूने यह क्या किया।  
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