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भ्रष्टाचार निवारण संगठन करेगा किसान से उगाही की जांच

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सीतापुर। रेउसा पुलिस द्वारा किसान से एक लाख रुपये की अवैध वसूली मामले की जांच अब भ्रष्टाचार निवारण संगठन बरेली इकाई को सौंपी गई है। हालांकि सीओ बिसवां से कराई गई जांच में तत्कालीन एसओ दोषी पाए गए हैं।
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इस मामले में एक दरोगा, सिपाही व पूर्व प्रधान के विरुद्ध रेउसा थाने में पहले ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जा चुका है। तत्कालीन एसओ की भूमिका की जांच भी चल रही थी।
कार्रवाई आगे बढ़ती इसी बीच विधायक सेवता की शिकायत पर यह मामला भ्रष्टाचार निवारण संगठन बरेली इकाई को सौंप दिया गया।
मालूम हो, कि अगस्त 2018 में रेउसा पुलिस ने अपना गल्ला ट्रैक्टर-ट्रॉली से सीतापुर मंडी ला रहे ताहपुर निवासी किसान प्रेम कुमार को रोका था। गल्ला कोटे का कहते हुए वाहन कब्जे में लेकर पुलिस उसे थाने ले गई। वाहन छोड़ने के लिए रेउसा पुलिस ने किसान से डेढ़ लाख रुपये मांगे।
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किसान के मुताबिक, पूर्व प्रधान सरवन तिवारी के जरिए एक लाख रुपया देने पर वाहन छोड़ा गया था। पीड़ित किसान की तहरीर पर 31 अगस्त 2018 को इस मामले में रेउसा थाने में तैनात तत्कालीन एसआई राधेश्याम यादव, सिपाही अभय मिश्र व पूर्व प्रधान सरवन तिवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था।
विधायक सेवता ने एसओ की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए जांच के लिए एसपी से कहा था। इस पर तत्कालीन एसपी ने तत्कालीन सीओ बिसवां को जांच सौंपी। काफी समय बाद तक जांच बेनतीजा रहने पर विधायक ने जांच आईजी रेंज की निगरानी में लखनऊ के किसी सीओ से कराने को लेकर एसपी व पुलिस के आला अफसरों को पत्र लिखा था।
पुलिस महानिरीक्षक लखनऊ परिक्षेत्र के निर्देश पर इस मामले की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन बरेली इकाई को सौंप दी गई है।
अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन को प्रेषित पत्र में एसपी ने बताया है कि तत्कालीन सीओ बिसवां की जांच के दौरान साक्षियों के बयान, आरोपित कर्मचारीगण एवं घटना से संबधित लोगों के मोबाइल की कॉल डिटेल के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी रेउसा महेश पाठक का नाम अभियुक्त के रूप में प्रकाश में आया।
जांच संपादित की जा रही थी, इसी बीच पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर मामले की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन बरेली इकाई को सौंप दी गई है।
रेउसा पुलिस द्वारा किसान से वसूली के मामले में तत्कालीन एसओ की जांच सीओ बिसवां कर रहे थे। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कुछ समय पहले इस मामले की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन बरेली इकाई को ट्रांसफर कर दिया गया है।
-एलआर कुमार, पुलिस अधीक्षक
यह भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन थाना प्रभारी महेश पाठक की मुख्य भूमिका है। देर से ही सही आखिर यह जांच में सच साबित हुआ। उम्मीद है जल्द ही मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप इस मामले के मुख्य आरोपी व दोषी सभी पुलिस कर्मी जेल जाएंगे व सेवा से बर्खास्त किए जाएंगे।
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-ज्ञान तिवारी, विधायक सेवता
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