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कोरोना का इलाज कर रही टीम के भोजन में भी गड़बड़ी

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सीतापुर। खैराबाद के एल-1 अस्पताल में कोरोना से संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों की डाइट भी गड़बड़ी का शिकार हो गई है। ड्यूटी को फर्ज समझकर अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर मरीजों की जान बचाने में जुटे धरती के भगवान के खाने पर सरकारी ‘डाका’ पड़ रहा है। डाइट को लेकर शासन और सीएमओ के जारी पत्र एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं।
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डॉक्टर व टीम को प्रतिदिन 500 रुपये की डाइट देना शासन से तय है, पर जिले में उन्हें 115 रुपये के हिसाब से रोजाना डाइट दी जा रही है। इस गड़बड़ी व गुणवत्ता विहीन खाना मिलने से डॉक्टरों में नाराजगी है। खैराबाद सीएचसी (कोविड एल-1 अस्पताल) में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने के लिए डॉक्टरों समेत 25 स्वास्थ्य कर्मियों की टीम है। इसमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन स्वीपर तक शामिल है।
ये सभी अपने घर से दूर रहकर दिन-रात मरीजों की सेवा कर रहे हैं। तीन शिफ्टों में काम करने वाली आठ कर्मियों की टीम अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर मरीजों की जान बचाने के लिए फर्ज निभाकर मानवता की मिसाल पेश कर रही है। टीम पिछले सात दिनों से ड्यूटी कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य महकमे की ओर से मिलने वाली डाइट से ये संतुष्ट नहीं है। सुबह के नाश्ते से लेकर, दोपहर और रात को मिलने वाले खाना इन सभी को भा नहीं रहा है।
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इस वजह से टीम में सिस्टम को लेकर नाराजगी है। सरकार की ओर से कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर, टीम को प्रतिदिन 500 रुपये की डाइट देने के आदेश जिले को दिए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि सीतापुर सीएमओ डॉक्टर आलोक वर्मा की ओर से टीम को खाना देने वाले होटल को जारी गए किए पत्र में 115 रुपये में ही प्रति व्यक्ति एक दिन की डाइट देने का आदेश है। सूत्रों की माने तो प्रति व्यक्ति 385 रुपये बचाकर डॉक्टरों के निवाले पर सरकारी डाका डाला जा रहा है।
डीजी स्वास्थ्य की हिदायत के बाद भी सुधार नहीं
कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों को अच्छी गुणवत्ता का खाना न मिलने का ये मामला कोई पहला नहीं है। अभी चंद रोज पहले की ही बात है, जब घटिया खाना देने की शिकायत महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तक पहुंच गई थी। इस गंभीर मसले को लेकर उन्होंने सीएमओ डॉक्टर आलोक वर्मा से स्पष्टीकरण तलब कर टीम को अच्छी क्वालिटी की डाइट देने के आदेश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी न तो कोई सबक लिया गया और न ही कोई सुधार हो रहा है।
सवालों के घेरे में सीएमओ की मंशा
सूत्रों की माने तो सीएमओ ने कोरोना मरीजों के इलाज में लगी टीम को खाना देने के लिए उस टेंडर के पत्र को ट्रीट फैमिली रेस्टोरेंट को जारी कर दिया है, जिस टेंडर पर वह आम दिनों में होने वाली स्वास्थ्य विभाग की मीटिंग, प्रेस कॉन्फ्रेंस में 115 रुपये के हिसाब से प्रति व्यक्ति का भुगतान करते थे, लेकिन कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों को अच्छी सुविधाएं, बेहतर क्वालिटी का 500 रुपये में खाना देने का आदेश सरकार का है।
लेकिन इसके बाद सीएमओ ने जैसे ही 6 अप्रैल को जिले में कोरोना के मरीज मिले, उसी तारीख को जेल रोड पर स्थित ट्रीट होटल स्वामी को टेंडर का आदेश पत्र जारी कर कोविड-19 के मरीजों को 115 रुपये में खाना देने के लिए कहा। ये टेंडर सात दिसंबर 2019 को हुआ था। यही वजह है कि सीएमओ की मंशा सवालों के घेरे में आ गई है।
115 रुपये में ये मिलता है खाना
सूत्र बताते हैं कि एमजे गोल्डन पैलेस में क्वारंटीन डॉक्टरों को सुबह पराठा, अचार और चाय। दोपहर में दाल, चावल, सब्जी, रोटी, रायता और रात को रसीली, सूखी सब्जी, चावल रोटी दी जाती है, लेकिन डॉक्टरों को ये खाना अच्छा नहीं लगता।
वजह है कि इसकी क्वालिटी अच्छी नहीं होती है। ट्रीट फैमिली रेस्टोरेंट के स्वामी दीपक रस्तोगी ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि 6 अप्रैल को कोरोना मरीज मिलने के बाद सीएमओ का पत्र आया था, जिसमें सात दिसंबर 2019 को हुए टेंडर में 115 रुपये के हिसाब से प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन खाना देने को कहा गया था। टेंडर के हिसाब से 115 रुपये की डाइट रोजाना दी जाती है। अगर मीनू में कोई बदलाव करेंगे तो बदलकर दूसरा दिया जाएगा।
डॉक्टरों को पसंद का मिलेगा खाना : एसीएमओ
एमजे गोल्डन पैलेस में क्वारंटीन डॉक्टरों और उनकी टीम की देखरेख में लगे नोडल अधिकारी/एसीएमओ डॉक्टर रविदास बताते हैं कि उन्हें सोमवार को इसकी जानकारी हुई है कि टीम को अच्छा खाना नहीं मिलता है। फल और दूध नहीं मिलने की जानकारी हुई है। टीम से बातकर उनकी पसंद का मीनू बनवाया जाएगा। आगे से डॉक्टरों की पसंद का ही खाना और फल दिया जाएगा।
अभी तक टेंडर के आधार पर 115 रुपये के हिसाब से डॉक्टरों को डाइट दी जाती थी, लेकिन सोमवार सुबह ट्रीट होटल को केजीयमयू लखनऊ की लिस्ट दे दी गई है। अब जो खाना केजीएमयू के डॉक्टरों को दिया जाता था, वही इन लोगों को मिलेगा। बात हो गई है।
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-डॉ. आलोक वर्मा, सीएमओ
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