सीतापुर। स्वास्थ्य महकमा जागरूकता और बचाव के नाम पर लकीर पीट रहा है। जिला अस्पताल में अब तक ऐसे कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे अस्पताल आने वाले लोगों मेें जागरूकता फैल सके। इससे संक्रमण का खतरा बरकरार है, लेकिन जिम्मेदारों ने इससे निपटने की कोई तैयारी नहीं की है।
कोरोना वायरस का प्रकोप दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इस महामारी से बचने के लिए सिर्फ जागरूकता ही बचाव है, लेकिन इसकी कमी से लोगों में डर घर करता जा रहा है। कहीं पर भी अधिक लोगों के एक पास खड़े होने पर रोक लगी है।
कार्रवाई का भी आदेश है, लेकिन इसके बाद भी जिला अस्पताल में हालात काफी खराब हैं। अस्पताल में रोजाना हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, इसमें मरीज से लेकर तीमारदार, रिश्तेदार तक शामिल हैं।
ये हाल तब है, जब सरकार की ओर सेे बकायदा गाइडलाइन जारी है, लेकिन फिर भी हर बीमारी के मरीज इमरजेंसी से लेकर ओपीडी और वार्डों तक जा रहे हैं। उनके साथ में परिजन और रिश्तेदार भी होते हैं।
लोग एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं, इससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग संजीदा नजर नहीं आ रहा है। बेरोकटोक लोगों की जिला अस्पताल गेट से इंट्री हो रही है। बुधवार को अमर उजाला की पड़ताल में स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खुल गई।
आइसोलेशन वार्ड बंद, डॉक्टर और स्टाफ नदारद
अस्पताल प्रशासन के इंतजामों की बात करें तो कोरोना से संक्रमित मरीजों (संदिग्धों) के लिए जिला अस्पताल में पांच कमरों का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, जिसमें दस बेड हैं। एक डॉक्टर, नर्स, स्वीपर की तैनाती है, पर ये स्टाफ हर वक्त आइसोलेशन वार्ड में नहीं मिलेेगा। आइसोलेशन वार्ड बंद रहता है। जिम्मेदारों का तर्क है कि संदिग्ध मरीज आने पर कमरा खोलकर मरीज को आइसोलेट किया जाएगा।