जाली दस्तावेज के आधार पर सिम एक्टिवेट कर नेपाल व पाकिस्तान भेजने वाला संतराम महज आठवीं पास है। धरैंचा गांव निवासी संतराम अपने गांव के लोगों से बहुत कम बातचीत करता था। ग्रामीणों के अनुसार संतराम का परिवार मजदूरी करता है। चंद समय में ही उसकी आय तेजी से बढ़ी, जिससे ग्रामीण भी दंग थे। शनिवार को एटीएस की कार्रवाई के बाद उसका राज सामने आया है।
संतराम ने वर्ष 2022 में धरैंचा गांव के बाहर मोबाइल की दुकान खोली। वह सिम कार्ड बेचने के साथ मोबाइल रिपेयर का काम भी करने लगा। इसके बाद उसने साइबर क्राइम की दुनिया में कदम रखा। महंगे दर पर सिम कार्ड बेचकर उसने एक बाइक खरीदी। वहीं, अपने कच्चे मकान को गिराकर दो हजार वर्ग फीट में पक्का मकान बनवाया। अपनी दुकान धरैंचा से हटाकर ढेढूराई लग गया। वहां भी करीब छह माह तक रहा।
करीब डेढ़ वर्ष पहले बिजवार में पुलिस चौकी के पास सचिन मोबाइल शॉप के नाम से दुकान खोली। यहीं से एटीएस ने शनिवार को उसे गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार एटीएस को संतराम के विभिन्न प्रदेशों के साथ विदेश में भी कुछ लोगों से संपर्क होने के साक्ष्य मिले हैं। उसके दो बैंक खातों में लाखों रुपये की रकम भी मिली है।
25 हजार रुपये देने का लालच देकर खुलवाता था खाता
संतराम अपनी दुकान से स्थानीय लोगों को फोनकर कमीशन पर बैंक खाते खुलवाने के लिए तैयार करता था। वह लोगों से कहता था कि बैंक खाता खुलवाने पर उनके पास 25 हजार रुपये आएंगे। इसके बाद साइबर ठगी की रकम उन्हीं लोगों के खाते में मंगवाकर तय कमीशन देकर उनसे निकलवा लेता था।
संतराम ने करीब तीन वर्ष पूर्व अपनी पत्नी शालू को छोड़कर साली से शादी कर ली। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि संतराम अपनी पहली पत्नी शालू की फोटो और जाली दस्तावेज का इस्तेमाल कर सिम कार्डों को एक्टिवेट करता था। संतराम ने विभिन्न लोगों के आधार कार्ड व आईडी में छेड़छाड़ भी की।
2017 में भी पकड़े गए थे 47 हजार एक्टिवेटेड सिम कार्ड
वर्ष 2017 में एटीएस ने स्थानीय क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर खैराबाद, शहर कोतवाली, संदना व कुछ अन्य स्थानों से 47 हजार से अधिक एक्टीवेटेड सिम कार्ड का जखीरा बरामद किया था। बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, एक्टीवेशन फार्म, फर्जी आइडी, पासपोर्ट, फोटो व अन्य तमाम सामान भी बरामद किए थे। ये सभी सिम कार्ड साइबर क्राइम में इस्तेमाल होने वाले थे।